Aalha Khand

Format:Hard Bound

ISBN:81-7055-680-5

Author:ASHA GUPT

Pages:390

MRP:Rs.395/-

Stock:In Stock

Rs.395/-

Details

पूरा आल्ह खण्ड पढ़ने के बाद निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि इसमें प्रेम और युद्ध के अनेक गाथा-चक्र घटना सूत्र में पिरोये गये हैं। सामन्ती-शौर्य के इस रोमांस काव्य में नैनागढ़ की लड़ाई सबसे रोचक और लोकप्रिय है। सोनवा हरण का प्रसंग सबसे प्रसिद्ध। मलखान का सिरसा की लड़ाई में वध तथा बेला के गौने की लड़ाइयाँ सबसे मार्मिक। विलियम क्रुक ने तो अंग्रेजी में एक पुस्तिका तक प्रकाशित की थी। किन्तु विदेशी और देशी इतिहासकारों का ध्यान सबसे अधिक ‘आल्हा-मनावन’ वाले प्रसंग पर केन्द्रित रहा।

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ASHA GUPT

ASHA GUPT बांग्ला भाषा से अनभिज्ञ हिन्दी पाठक इस तथा अन्य अद्वितीय कृतियों से महरूम न रह जाएँ इसलिए ‘काल वेला’(अशुभ वेला) जैसे उपन्यास का हिन्दी रूपान्तरण किया गया है । इस उपन्यास के अनुवाद में कोशिश यही रही है कि पाठकों को पढ़ते समय मूल का-सा आनन्द मिल सके । डॉ. आशा गुप्ता बांग्ला भाषा से विमल मित्र की बाई, विभूतिभूषण मुखोपाध्याय की ‘नीलम की अंगूठी’ गजेन्द्र कुमार मित्र का ‘परिचय नहीं पाया’ , सुनील गंगोपाध्याय के ‘एक दो तीन पक्षी’ ‘आधी रात का मनुष्य’ , ‘धूलिवसन’, सुशील राय का ‘सती दाह’ अनुवाद कर चुकी हैं ।

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