Singur Aur Nandigram Se Nikale Sawal

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-633-7

Author:MAHASHWETA DEVI

Pages:152

MRP:Rs.200/-

Stock:In Stock

Rs.200/-

Details

सिंगुर और नन्दीग्राम से जितने सवाल निकले हैं, उनका समाधान पँूजीवादी और साम्यवादी, दोनों दायरों में सम्भव नहीं दिखता। हो भी नहीं सकता, क्योंकि ये दोनों घटनाएँ पूँजीवादी और साम्यवादी नीतियों के अवैध सम्बन्धों के चलते ही उत्पन्न हुई हैं। उदारीकरण की प्रक्रिया के कारण बने इन सम्बन्धों ने लोभ और क्रूरता के ऊँचे प्रतिमान कायम किये हैं। इन दोनों घटनाओं से संवेदनशील व्यक्ति तो हैरान हैं ही, वे कम्युनिस्ट भी कम परेशान नहीं हैं, जो मानते थे कि कम्युनिस्ट पार्टी का काम तो मजदूरों और किसानों की तरफ से पूँजीपतियों से लड़ना होता है।

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About the writer

MAHASHWETA DEVI

MAHASHWETA DEVI बांग्ला की प्रख्यात लेखिका महाश्वेता देवी का जन्म 1926 में ढाका में हुआ। वह वर्षों बिहार और बंगाल के घने कबाइली इलाकों में रही हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में इन क्षेत्रों के अनुभव को अत्यन्त प्रामाणिकता के साथ उभारा है।महाश्वेता देवी एक थीम से दूसरी थीम के बीच भटकती नहीं हैं। उनका विशिष्ट क्षेत्र है-दलितों और साधन-हीनों के हृदयहीन शोषण का चित्रण और इसी संदेश को वे बार-बार सही जगह पहुँचाना चाहती हैं ताकि अनन्त काल से गरीबी-रेखा से नीचे साँस लेनेवाली विराट मानवता के बारे में लोगों को सचेत कर सकें। गैर-व्यावसायिक पत्रों में छपने के बावजूद उनके पाठकों की संख्या बहुत बड़ी है। उन्हें साहित्य अकादेमी, ज्ञानपीठ पुरस्कार व मैग्सेसे पुरस्कार समेत अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।

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