Man Ka Tulsi Chaura

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-227-5

Author:

Pages:314

MRP:Rs.495/-

Stock:In Stock

Rs.495/-

Details

पहला ही लेख तरुण विजय का मन को छू गया। ”...देश का मन और जल दोनों गँदला गये हैं। दिल्ली में यमुना का आचमन तो दूर, स्पर्श तक नहीं किया जा सकता। ...पीढ़ियों से अपने धार्मिक संस्कार सुरक्षित रखे सूरीनाम और त्रिनिदाद के लोग काशी गये तो गन्दगी से भरी गलियाँ,...और ईश्वरोपासना की पहली ही सीढ़ी पर जाति के जुगुप्साजनक अहंकार का परिचय।...अब कोई विधर्मी नहीं, जो हमारी गंगा, जमुना या मन्दिरों को गन्दा करने आते हों। यह काम हम खुद करते हैं।...“ इस पुस्तक में कई स्थलों पर लेखक का क्षोभ व्यक्त हुआ है: प्रकरण चाहे ‘कण्णगी का पुनर्जन्म’ हो, चाहे ‘कोहिमा की कूकीथोई के प्रश्न’, चाहे ‘दिल्ली से दूरदेश’। असुविधाजनक प्रश्नों का सामना करने की तत्परता इन टिप्पणियों के पीछे सर्वत्र कार्यरत है।

Additional Information

No Additional Information Available

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality