Sampradayik Rajniti Tathya Evam Mithak

Format:Hard Bound

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Pages:284


MRP : Rs. 300/-

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Details

बाबरी मस्जिद का विध्वंस इस देश के राजनीतिक जीवन की बहुत बड़ी घटना थी। इसके बाद से हिन्दू दक्षिणपन्थी समूहों में एक नयी बात हो रही है। कहा जा रहा है कि मुसलमानों को हमने बहुत झेल लिया। यहाँ रहने के लिए उन्हें अब सबक सिखाया जाना चाहिए। धर्मपरायण मुसलमानांे के रूप में तथा वहशी बहुसंख्यकों के सामने अपनी धार्मिक पहचान खोये बगैर वे यहाँ कैसे रह सकते हैं? संघ परिवार द्वारा गढ़े गये मिथकों के पर्दाफाश करने का प्रयास इस पुस्तक में किया गया है। यह बताने का भी प्रयास किया गया है कि उनकी असलियत क्या है और उनके पीछे क्या मंशा है। इसका मकसद है विविध पहचानों और संस्कृतियों के नाजुक ताने-बाने को तोड़ना जिसे सर्वधर्म समभाव के सिद्धान्त के आधार पर हमारे राष्ट्र के निर्माताओं ने बड़े जतन से पोसने का प्रयास किया था।

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