Suno Malik Suno

Format:Hard Bound

ISBN:81-8143-483-8

Author:MAITREY PUSHPA

Pages:236

MRP:Rs.495/-

Stock:In Stock

Rs.495/-

Details

मैं मानकर चलती हूँ कि सामाजिक नैतिकताएँ निश्चित ही लेखक की वे मर्यादाएँ नहीं हो सकतीं जिनका वह नियमपूर्वक पालन कर पाये। लेखकीय स्वतन्त्रता परम्पराबद्ध नैतिकता पर समाज के सामने सवाल खड़े करती है और हर हाल में टकराहट की स्थिति बनती है। इसका मुख्य कारण है समय का बदलाव। हमारे समाज में आज भी रामायण (रामचरित मानस) के आदर्श चलाये जाते हैं-भरत सम भाई, लक्ष्मण जैसा आज्ञाकारी, राम जैसा मर्यादा पुरुष, सीता जैसी कुलवधू। अयोध्या का रामराज्य-बेशक ये आदर्श भारतीय परिवार को पुख्ता करने के लिए स्तम्भ स्वरूप हैं, लेकिन व्यक्ति का जीवन रामचरित मानस की चौपाई भर नहीं है और न मनुस्मृति के श्लोक और न आर्यसमाजी मन्त्रों का रूप।

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MAITREY PUSHPA

MAITREY PUSHPA जन्म : 30 नवम्बर, 1944, अलीगढ़ जि़ले के सिकुर्रा गाँव में। आरम्भिक जीवन : जि़ला झाँसी के खिल्ली गाँव में। शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी साहित्य), बुंदेलखंड कॉलेज, झाँसी। कृतियाँ : चिन्हार, गोमा हँसती है, ललमनियाँ तथा अन्य कहानियाँ, पियरी का सपना, प्रतिनिधि कहानियाँ, समग्र कहानियाँ (कहानी-संग्रह); बेतवा बहती रही, इदन्नमम, चाक, झूला नट, अल्मा कबूतरी, अगनपाखी, विजन, कही ईसुरी फाग, त्रिया हठ, गुनाह-बेगुनाह, फ़रिश्ते निकले (उपन्यास); कस्तूरी कुंडल बसै, गुड़िया भीतर गुड़िया (आत्मकथा); खुली खिड़कियाँ, सुनो मालिक सुनो, चर्चा हमारा, आवाज़, तब्दील निगाहें (स्त्री विमर्श); फाइटर की डायरी (रिपोर्ताज)। फैसला कहानी पर टेलीफिल्म वसुमती की चिट्ठी। प्रमुख सम्मान : सार्क लिट्रेरी अवार्ड, 'द हंगर प्रोजेक्ट’ (पंचायती राज) का सरोजिनी नायडू पुरस्कार, मंगला प्रसाद पारितोषिक, प्रेमचन्द सम्मान, हिन्दी अकादमी का साहित्यकार सम्मान, मध्यप्रदेश साहित्य परिषद का वीरसिंह जूदेव पुरस्कार, कथाक्रम सम्मान, शाश्वती सम्मान एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का महात्मा गांधी सम्मान।

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