Hindi Cinema Ka Sach

Format:Hard Bound

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Pages:184

MRP:Rs.300/-

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समाज और बाजार एक दूसरे से जुड़े हैं। बाजार समाज का ही एक अंग है। बाजार भी हमें चाहिए। आज का आधुनिक समाज ऐसा है, जिसके बाजार में सब कुछ बिक रहा है। अभी समाज में बाजार के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है। आधुनिक समाज में मैटेरियलिज्म बढ़ रहा है। लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें। यह अच्छा है या बुरा, हमें तय करना है। हमारे पास ऐसी कसौटी होनी चाहिए, जिसके आधार पर हम मैटेरियलिज्म का मूल्यांकन कर सकें और उसी के आधार पर उसका विरोध भी।

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