Cinema Aur Sanskriti

Format:Hard Bound

ISBN:81-7055-773-9

Author:RAHEE MASOOM RAZA

Pages:212


MRP : Rs. 425/-

Stock:In Stock

Rs. 425/-

Details

सिनेमा और संस्कृति

Additional Information

राही लगभग पच्चीस साल फिल्म जगत से जुड़े रहे। उन्होंने तीन सौ से अधिक फिल्मों की पटकथा और संवाद लिखे। उन्होंने अच्छी-बुरी सभी तरह की फिल्में लिखीं। वे बहुत यथार्थवादी थे और सफाई से कहते थे कि फिल्म में लेखक की कोई अहम भूमिका नहीं होती फिर भी मैं अपनी बात कहने के लिए फिल्म का कुछ हिस्सा हथिया लेता हूँ। उनकी कुछ सफल और महत्त्वपूर्ण फिल्में हैं - 'वैराग', 'फाँसी', 'हत्यारा', 'प्रेम कहानी', 'दो प्रेमी', 'परछाइयाँ', 'जुदाई', 'सगीना', 'मैं तुलसी तेरे आँगन की', 'अन्धा कानून', 'रास्ते का पत्थर', 'सरगम', 'जूली'। उन्हें संवाद और पटकथा के लिए तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार मिला। परन्त राही की पहचान दूरदर्शन के छोटे पर्दे पर ही एक लेखक के रूप में बनी। उन्होंने अनेक सफल धारावाहिक लिखे। लेकिन महाभारत के संवादों और पटकथा ने तो उन्हें अमर बना दिया। इस पुस्तक में राही सिनेमा का सम्बन्ध साहित्य के साथ समाज से भी जोड़ते हैं। वे व्यक्ति की अस्मिता का प्रश्न भी उठाते हैं। बुद्धिजीवियों पर कटाक्ष करते हैं कि वे देश और जनता की समस्याओं पर चुप्पी साधकर भ्रष्ट और बेईमान राजनीतिज्ञों को लाभ पहुंचा रहे हैं। उन्हें बार-बार अलीगढ़ भी याद आता है और गम्भीर बात करते-करते अलीगढ़ की। गलियों और सड़कों में खो जाते हैं। धर्म, संस्कृति, राष्ट्रीयता के सवालों पर खुलकर बहस करने की बात करते हैं।

About the writer

RAHEE MASOOM RAZA

RAHEE MASOOM RAZA राही मासूम रज़ा जन्म : 1 सितम्बर, 1927, गाज़ीपुर (उत्तर प्रदेश)। प्रारम्भिक शिक्षा वहीं, परवर्ती अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में। अलीगढ़ यूनिवर्सिटी से ही उर्दू साहित्य के भारतीय व्यक्तित्व पर पीएच. डी.। अध्ययन समाप्त करने के बाद अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में अध्यापन कार्य से जीविकोपार्जन की शुरुआत कई वर्षों तक उर्दू साहित्य पढ़ाते रहे। बाद में फ़िल्म-लेखन के लिए मुम्बई गए। जीने की जी-तोड़ कोशिशें और आंशिक सफलता। फ़िल्मों में लिखने के साथ-साथ हिन्दी-उर्दू में समान रूप से सृजनात्मक लेखन। फिल्म-लेखन को बहुत-से लेखकों की तरह ‘घटिया काम' नहीं, बल्कि 'सेमी क्रिएटिव' काम मानते हैं। बी.आर. चोपड़ा के निर्देशन में बने महत्त्वपूर्ण दूरदर्शन धारावाहिक महाभारत के पटकथा और संवाद-लेखक के रूप में प्रशंसित। एक ऐसे कवि-कथाकार, जिनके लिए भारतीयता आदमीयत का पर्याय है। प्रकाशित पुस्तकें : आधा गाँव, टोपी शुक्ला, हिम्मत जौनपुरी, ओस की बूँद, दिल एक सादा काग़ज़, कटरा बी आर्जू, असंतोष के दिन (हिन्दी उपन्यास); मुहब्बत के सिवा (उर्दू उपन्यास); मैं एक फेरीवाला (हिन्दी कविता-संग्रह); नया साल, मौजे-गुल : मौजे सबा, रक्से-मय, अजनबी शहर : अजनबी रास्ते (उर्दू कविता-संग्रह); तथा छोटे आदमी की बड़ी कहानी (जीवनी)।

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