PLUTO

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5072-598-6

Author:GULZAR

Pages:144

MRP:Rs.200/-

Stock:In Stock

Rs.200/-

Details

यशस्वी व लोकप्रिय शायर गुलज़ार साहिब के नये काव्य-संकलन ‘प्लूटो’ में जीवन के छोटे-छोटे लम्हों को मोतियों की तरह पिरोया गया है। ‘प्लूटो’ की नज़्में गुलज़ार की अभिवयक्ति को सबके समक्ष लाती हैं और नक्काशी हुई मूर्तियों की तरह ज़ेहन में उतरती हैं जिन्हें मूर्तिकार घंटों बैठकर अपनी कल्पना की उड़ानों से तराशता है।

Additional Information

‘प्लूटो’ से प्लेनेट का रुतबा तो हाल ही में छिना है। साईंसदानों ने कह दिया - “जाओ... हम तुम्हें अपने नौ ग्रहों में नहीं गिनते... तुम प्लेनेट... के नहीं हो!” मेरा रुतबा तो बहुत पहले ही छिन गया था, जब घरवालों ने कह दिया - “बिजनेस फ़ैमली में ये ‘मीरासी’ कहाँ से आ गया!” ख़ामोशी कहती थी - तुम हम में से नहीं नहीं हो! अब ‘प्लूटो’ की उदासी देखकर, मेरा जी बैठ जाता है। बहुत दूर है... बहुत छोटा है... मेरे पास जितनी छोटी-छोटी नज़्में थीं। सब उसके नाम कर दीं। बहुत से लम्हे छोटे, बहुत छोटे होते हैं। अक्सर खो जाते हैं। मुझे शौक़ है उन्हें जमा करने का। मौज़ू के ऐतबार से, इस मजमूए में बहुत सी नज़्में ग़ैर-रिवायती हैं... लेकिन वो क्या बुरी बात है? गुलज़ार

About the writer

GULZAR

GULZAR असाधारण और बहुआयामी प्रतिभा के धनी गुलज़ार श्रेष्ठता और लोकप्रियता, दोनों ही कसौटियों पर सफल एक ऐसे फनकार हैं जो विभिन्न कला माध्यमों में काम करने के साथ-साथ अभिव्यक्ति के अपने माध्यम की खोज भी करते रहे हैं। वे एक मशहूर शायर, अप्रतिम फिल्मकार, संजीदा कहानी लेखक एवं बेहतरीन गीतकार हैं। साथ ही, वे एक मँजे हुए संवाद और पटकथा लेखक भी हैं। 18 अगस्त 1934 को झेलम जिले (अब पाकिस्तान में) के दीना गाँव में जन्मे गुलज़ार ने विमल रॉय और हृषीकेश मुखर्जी की छाया में अपना फिल्मी सफर शुरू किया। गीतकार के रूप में उन्होंने सचिनदेव बर्मन के लिए बंदिनी के लिए पहली बार गीत लिखे। गुलज़ार ने खुशबू, आँधी (आपातकाल के दौरान प्रतिबंधित), लिबास, मौसम, मीरा, परिचय, अंगूर, माचिस और हू तू तू जैसी मौलिक फिल्मों के निर्देशन के अलावा मिर्ज़ा ग़ालिब पर एक उत्कृष्ट टीवी सीरियल भी बनाया है। गुलज़ार की कविताएँ जानम, एक बूँद चाँद, कुछ और नज़्में साइलेंसेज़, पुखराज, ऑटम मून, त्रिवेणी, रात, चाँद और मैं, रात पश्मीने की, यार जुलाहे तथा पन्द्रह पाँच पचहत्तर में संकलित हैं। कहानियों के महत्त्वपूर्ण संग्रह हैं चौरस रात, धुआँ, जीना यहाँ और ड्योढ़ी (हिन्दी और उर्दू)। रावी पार में गुलज़ार ने विमल रॉय के संस्मरण लिखे हैं। उन्होंने बच्चों के लिए कुछ बेहद अच्छी रचनाएँ भी की हैं। पद्म भूषण, साहित्य अकादेमी पुरस्कार, ग्रेमी पुरस्कार, ऑस्कर अवार्ड तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज, शिमला के प्रतिष्ठित लाइफ टाइम अचीवमेंट फेलोशिप सहित दर्जनों अलंकरणों से सम्मानित गुलज़ार को बीस बार फिल्मफेयर पुरस्कार एवं सात बार नेशनल अवार्ड मिल चुका है। वे मुम्बई में रहते हैं और फिल्मों के लिए गीत, संवाद एवं पटकथा लिखते हुए कुछ महत्त्वपूर्ण कवियों का अनुवाद कर रहे हैं।

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