NEERAV SANDHYA KA SHAHAR : SAKURA KA DESH

Original Book/Language: जापानी भाषा से हिन्दी भाषा में अनूदित। लेखिका : कोनो फुमियो, अनुवादक : तोमोको किकुचि

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5072-573-3

Author:FUMIYO KOUNO AND TOMOKO KIKUCHI

Translation:जापान की चर्चित माँगा चित्रकला की प्रसिद्ध रचनाकार कोनो फुमियो की विख्यात चित्रकथा 'नीरव संध्या का शहर : साकुरा का देश' का हिन्दी अनुवाद अब हिन्दी साहित्य जगत की एक कड़ी बनने के लिए इच्छुक है। अभी तक इस पुस्तक का अनुवाद कोरिया, ताइवान, इंगलैंड, अमेरिका, ओस्ट्रेलिया आदि देशों में हो चुका है। यह पुस्तक जापान के हिरोशिमा में हुई त्रासदी पर आधारित है। रचनाकार कोनो फुमियो का कहना है, जिस विश्व में जापान और हिरोशिमा स्थित है, उसी विश्व में प्रेम करने वाले सभी पाठकों के लिए मैंने यह कहानी लिखी है। कोनो फुमियो को पुस्तकालय में बैठकर अध्ययन करना और अपनी चिड़िया को अपने बाजू पर बैठाकर सूर्यास्त दिखाना अच्छा लगता है। यह रचना मामूली जीवन की अमूल्यता की अनुभूति है। जापानी कॉमिक्स की विशेषता है कि उसे उल्टी तरफ से पढ़ाया जाता है, इसके अनुवाद में भी कलात्मक गुणों को सुरक्षित रखा गया है।

Pages:106

MRP:Rs.110/-

Stock:In Stock

Rs.110/-

Details

जापानी भाषा से हिन्दी भाषा में अनूदित। लेखिका : कोनो फुमियो, अनुवादक : तोमोको किकुचि

Additional Information

जापान की चर्चित माँगा चित्रकला की प्रसिद्ध रचनाकार कोनो फुमियो की विख्यात चित्रकथा 'नीरव संध्या का शहर : साकुरा का देश' का हिन्दी अनुवाद अब हिन्दी साहित्य जगत की एक कड़ी बनने के लिए इच्छुक है। अभी तक इस पुस्तक का अनुवाद कोरिया, ताइवान, इंगलैंड, अमेरिका, ओस्ट्रेलिया आदि देशों में हो चुका है। यह पुस्तक जापान के हिरोशिमा में हुई त्रासदी पर आधारित है। रचनाकार कोनो फुमियो का कहना है, जिस विश्व में जापान और हिरोशिमा स्थित है, उसी विश्व में प्रेम करने वाले सभी पाठकों के लिए मैंने यह कहानी लिखी है। कोनो फुमियो को पुस्तकालय में बैठकर अध्ययन करना और अपनी चिड़िया को अपने बाजू पर बैठाकर सूर्यास्त दिखाना अच्छा लगता है। यह रचना मामूली जीवन की अमूल्यता की अनुभूति है। जापानी कॉमिक्स की विशेषता है कि उसे उल्टी तरफ से पढ़ाया जाता है, इसके अनुवाद में भी कलात्मक गुणों को सुरक्षित रखा गया है।

About the writer

FUMIYO KOUNO AND TOMOKO KIKUCHI

FUMIYO KOUNO AND TOMOKO KIKUCHI कोनो फुमियो - सितम्बर, सन् 1968 में जापान के हिरोशिमा शहर में जन्म। कोनो फुमियो जब मांगा (कॉमिक्स) की रचना शुरू की, तब वह सातवीं कक्षा की छात्रा थीं। वह हिरोशिमा विश्वविद्यालय की पढ़ाई को बीच में छोड़कर तोक्यो गयी और मांगा कलाकार के यहाँ मांगा की शिल्प सीखने लगीं। सन् 1995 में उनका प्रथम मांगा ‘माचिकादो हाना दायोरि’ का प्रकाशन हुआ। 2001 में उन्होंने होसो विश्वविद्यालय की पढ़ाई पूरी की। ‘यूनागि नो माचि, साकुरा नो कुनि’ (नीरव सन्ध्या का शहर, साकुरा का देश) को 2004 में आठवाँ संस्कृति मंत्रालय मेडिया कला सम्मेलन मांगा पुरस्कार और 2005 को नौवाँ तेजुका ओसामु संस्कृति पुरस्कार मिला। ‘कोनोसेकाइ नो कातासुमिनि’ को तेरहवाँ संस्कृति मंत्रालय मेडिया कला सम्मेलन मांगा पुरस्कार मिला। कोनो को पुस्तकालय में बैठकर अध्ययन करना और अपनी चिड़िया ‘तामानोओ’ को अपने बाजू पर बैठाकर उसे सूर्यास्त दिखाना अच्छा लगता है। उनका यह प्रिय कथन है, जो प्रसिद्ध फ्रांसीसी साहित्यकार अंड्रे जित ने कहा था ‘‘मैं हमेशा ऐसे इंसान के बारे में लिखना चाहता हूँ जिसका सच्चा सम्मान अदृश्य होता है।’’

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