ALOCHANA MEIN SAHAMATI-ASAHAMATI

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-557-3

Author:MANAGER PANDEY

Pages:207

MRP:Rs.395/-

Stock:In Stock

Rs.395/-

Details

आलोचना में चाहे सहमति हो या असहमति, उसका साधार और सप्रमाण होना जरूरी है तभी सहमति या असहमति विश्वसनीय होती है। आलोचना की विश्वसनीयता को सबसे अधिक खतरा होता है मनमानेपन से। आलोचना में तर्क-वितर्क, खण्डन-मण्डन, आरोप-प्रत्यारोप के लिए जगह होती है, पर उतनी ही जितनी विचारशीलता में सत्यनिष्ठा और सच्चाई के लिए जरूरी है। आलोचना सहमति या असहमति के नाम पर ‘मनमाने की बात’ नहीं है। जब आलोचना में मनमानेपन का विस्तार होता है तो आलोचना गैर-जिम्मेदार हो जाती है। गैर-जिम्मेदार आलोचना से वैचारिक अराजकता पैदा होती है। आलोचना में सहमति-असहमति का सन्तुलन तब बिगड़ता है जब खुद को सही मानने की जिद दूसरों को गलत साबित करने की कोशिश बनती है। पुस्तक के पहले निबन्ध में आज की हिन्दी आलोचना में सैद्धान्तिक सोच की दयनीय दशा पर चिन्ता व्यक्त की गयी है। दूसरे, तीसरे, चौथे और पाँचवें निबन्ध में हिन्दी आलोचना के सामने मौजूद कुछ महत्त्वपूर्ण सवालों पर विचार करने की कोशिश है। बाद के एक निबन्ध ‘उत्तर-आधुनिक युग में मध्ययुगीनता की वापसी’ में समकालीन सांस्कृतिक सन्दर्भ की छानबीन है। बाद के दो निबन्धों में हिन्दी में आत्मकथा की संरचना और संस्कृति पर सोच-विचार है। आगे के दो निबन्धों में दो पुस्तकों की समीक्षाएँ हैं। फिर माधवराव सप्रे, रामचन्द्र शुक्ल, शिवदान सिंह चौहान, राहुल सांकृत्यायन, यशपाल, पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’, राजेन्द्र यादव और सुरेन्द्र चौधरी के चिन्तन और लेखन का मूल्यांकन है। पुस्तक में मृदुला गर्ग की कहानियों की संवेदना, सोच और कला के विवेचन के साथ-साथ प्रसिद्ध संस्कृति विचारक अडोर्नो की आलोचना की संस्कृति सम्बन्धी सोच की समीक्षा भी की गयी है।

Additional Information

No Additional Information Available

About the writer

MANAGER PANDEY

MANAGER PANDEY सुप्रसिद्ध आलोचक मैनेजर पाण्डेय का जन्म 23 सितम्बर, 1941 को बिहार प्रान्त के वर्तमान गोपालगंज जनपद के गाँव ‘लोहटी’ में हुआ। उनकी आरम्भिक शिक्षा गाँव में तथा उच्च शिक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हुई, जहाँ से उन्होंने एम.ए. और पीएच. डी. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। पाण्डेय जी गत साढे़ तीन दशकों से हिन्दी आचोलना में सक्रिय हैं। उन्हें गम्भीर और विचारोत्तेजक आलोचनात्मक लेखन के लिए पूरे देश में जाना-पहचाना जाता है। उनकी अब तक प्रकाशित पुस्तकें हैं: शब्द और कर्म, साहित्य और इतिहास-दृष्टि, साहित्य के समाजशास्त्रा की भूमिका, भक्ति आन्दोलन और सूरदास का काव्य, अनभै साँचा, आलोचना की सामाजिकता, संकट के बावजूद (अनुवाद, चयन और सम्पादन), देश की बात (सखाराम गणेश देउस्कर की प्रसिद्ध बांग्ला पुस्तक ‘देशेर कथा’ के हिन्दी अनुवाद की लम्बी भूमिका के साथ प्रस्तुति), मुक्ति की पुकार (सम्पादन), सीवान की कविता (सम्पादन)। पाण्डेय जी के साक्षात्कारों के भी दो संग्रह प्रकाशित हैं: मेरे साक्षात्कार, मैं भी मुँह में जबान रखता हूँ। आलोचनात्मक लेखन के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित, जिनमें प्रमुख हैं: हिन्दी अकादमी द्वारा दिल्ली का साहित्यकार सम्मान, राष्ट्रीय दिनकर सम्मान, रामचन्द्र शुक्ल शोध संस्थान, वाराणसी का गोकुल चन्द्र शुक्ल पुरस्कार और दक्षिण भारत प्रचार सभा का सुब्रह्मण्य भारती सम्मान। मैनेजर पाण्डेय ने हिन्दी में एक ओर ‘साहित्य और इतिहास दृष्टि’ के माध्यम से साहित्य के बोध, विश्लेषण तथा मूल्यांकन की ऐतिहासिक दृष्टि का विकास किया है तो दूसरी ओर ‘साहित्य के समाजशास्त्रा’ के रूप में हिन्दी में साहित्य की समाजशास्त्राीय दृष्टि के विकास की राह बनाई है। अपने आलोचना-कर्म में वे परम्परा के विश्लेषणपरक पुनर्मूल्यांकन के भी पक्षधर रहे हैं। उन्होंने भक्त कवि सूरदास के साहित्य की समकालीन सन्दर्भों में व्याख्या कर भक्तियुगीन काव्य की प्रचलित धारणा से अलग एक सर्वथा नयी तर्काश्रित प्रासंगिकता सिद्ध की है। पिछले कुछ वर्षों में हिन्दी में दलित साहित्य और स्त्राी-स्वतन्त्राता के समकालीन प्रश्नों पर जो बहसें हुई हैं, उनमें पाण्डेय जी की अग्रणी भूमिका को बार-बार रेखांकित किया गया है। उन्होंने सत्ता और संस्कृति के रिश्ते से जुड़े प्रश्नों पर भी लगातार विचार किया है। कहा जा सकता है कि उनकी उपस्थिति प्रतिबद्धता और सहृदयता के विलक्षण संयोग की उपस्थिति है। जीविका के लिए अध्यापन का मार्ग चुनने वाले मैनेजर पाण्डेय जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के भाषा संस्थान के भारतीय भाषा केन्द्र में हिन्दी के प्रोफेसर रहे हैं। इसके पूर्व बरेली कॉलेज, बरेली और जोधपुर विश्वविद्यालय में भी प्राध्यापक रहे।

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality