MAATI KAHE KUMHAR SE

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-561-0

Author:DR. NARESH

Pages:244

MRP:Rs.375/-

Stock:In Stock

Rs.375/-

Details

‘माटी कहे कुम्हार से’ मूलतः एक आंचलिक उपन्यास है, जिसमें एक ऐसे नगर का भूगोल, इतिहास, जन-जीवन चित्रित किया गया है, जिसे भारत-विभाजन का ताण्डव नृत्य छू तक नहीं पाया था लेकिन डॉ. नरेश ने इसे एक बृहद् फलक देकर राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य प्रदान कर दिया है। भारत-विभाजन के सन्दर्भ में हिन्दू-मुस्लिम समस्या को चर्चा का विषय बनाकर कुशल उपन्यासकार ने विभाजन को विदेशी शासकों की गहरी चाल सिद्ध किया है और हिन्दू-मुसलमान दोनों को दोषमुक्त करार दिया है। उपन्यास का नायक मालेरकोटला के परिवर्तित परिवेश से आहत होकर वहाँ फिर से वही धार्मिक-सामाजिक सहिष्णुता लाने को कृतसंकल्प होता है और तमाम विरोधी स्वरों को पछाड़ता हुआ अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होता है। वह इस शहर को हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए एक प्रयोगशाला बनाता है। उद्देश्य बृहत्तर है कि यदि उसका परीक्षण सफल होता है तो वह इसी प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाएगा और दोनों समुदायों के बीच का वैमनस्य सदा के लिए समाप्त हो जाएगा।

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About the writer

DR. NARESH

DR. NARESH 7 नवम्बर, 1942, मालेरकोटला (पंजाब) में जन्मे कवि-कथाकार-आलोचक डॉ. नरेश लम्बे समय तक पंजाब विश्वविद्यालय में आधुनिक साहित्य के आचार्य एवं चंडीगढ़ साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष रहे हैं। आलोचना तथा रचनात्मक साहित्य की अनेक पुस्तकों की रचना के साथ-साथ उन्होंने हिन्दी-कविता की कई विस्मृत-विलुप्त पाण्डुलिपियाँ खोजकर उनको सम्पादित एवं प्रकाशित किया है। डॉ. नरेश को देश के विभिन्न राज्यों यथा पश्चिमी बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब आदि से राज्य-पुरस्कार, भारत सरकार का राष्ट्रीय पुरस्कार, म्यूज़िक वर्ल्ड, इंगलैण्ड का ‘पोएट ऑफष् दि मिलेनियम एवार्ड’ तथा अन्य कई राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। उनकी अनेक कविताओं-कहानियों का देश-विदेश की विभिन्न भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।

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