HINDI KA ATMAKATHATMAK SAHITYA

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-578-8

Author:DR. CHAMPA SRIVASTAVA

Pages:260

MRP:Rs.400/-

Stock:In Stock

Rs.400/-

Details

आत्मकथा, गद्य की अन्य विधाओं के समान ही हिन्दी साहित्य के लिए आधुनिक काल की उपज है। आत्मकथा लेखन की भावना का उदय भारतेन्दु युग से ही हुआ। भारतेन्दु युग से लेकर आज तक इस विधा का जिस प्रकार पल्लवन और विकसन हुआ है, उसे युगानुरूप ही लिखा गया है। भारतेन्दु युग में आत्मकथा लेखन का अधूरा प्रयास परिलक्षित होता है, जिसका स्पष्टीकरण तृतीय अध्याय के अन्तर्गत किया गया है। द्विवेदी युगीन आत्मकथाओं का विवेचन चतुर्थ अध्याय में किया गया है। छायावाद युग आते-आते इस विधा ने विकास के चरम को धारण कर लिया और युगीन आत्मकथाकारों ने स्वयं के अतीत का जो कच्चा चिट्ठा पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत किया, वह भविष्य में स्मरणीय रहेगा। इसके पश्चात छायावादोत्तर तथा वर्तमान युग में भी यह विधा विकासोन्मुख ही है। इस प्रकार युग के अनुसार ही शोध-विषय की व्याप्ति को प्रस्तुत किया है। युगीन आत्मकथाओं को प्रस्तुत करने के पूर्व युगीन परिस्थितियों का भी उल्लेख किया है, क्योंकि कोई भी आत्मकथाकार युग विशेष से ही प्रभावित होकर आत्मकथा लेखन हेतु अग्रसर होता है। आत्मकथाओं के आलोक में ही सम्बन्धित आत्मकथाकार के साहित्यिक व्यक्तित्व का, उसके विकासक्रम का तथा उसके जीवन सर्वस्व का प्रामाणिक परिचय प्राप्त किया जा सकता है। यदि आत्मकथाओं में घोषित नीतियों और साहित्यिक सिद्धान्तों को उनकी रचनाओं में घटित करके उनका पूर्वापर सापेक्ष और व्यावहारिक अध्ययन किया जाये तो उससे विभिन्न साहित्यकारों के व्यक्तित्व और कृतित्व का एक नया परिप्रेक्ष्य उद्घाटित किया जा सकता है। कहने का आशय यह है कि इन साहित्यकारों की कथनी और करनी का तुलनात्मक विवेचन किया जा सकता है। अभी तक साहित्यकारों की आत्मकथाएँ प्रचार और प्रसार के अभाव में दबी सी थीं, उन्हें खोज निकालने का श्रम ही नहीं किया गया था।

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About the writer

DR. CHAMPA SRIVASTAVA

DR. CHAMPA SRIVASTAVA डॉ॰ चम्पा श्रीवास्तव का जन्म 13 जुलाई 1951, रायबरेली (उ.प्र) में हुआ। इन्होंने कानपुर विश्वविद्यालय (उ.प्र.) से एम.ए. (हिन्दी) तथा सागर विश्वविद्यालय (म. प्र.) पीएच. डी. की। इनकी प्रकाशित कृतियाँ हैं - प्राचीन काव्य, मध्य युगीन काव्य, आधुनिक गद्य तथा नाटक, हिन्दी साहित्य का इतिहास, आधुनिक काव्य, भाषा विज्ञान, साहित्यालोचन के सिद्धान्त, अँजुरी भर अभिव्यक्ति। डॉ॰ चम्पा श्रीवास्तव उ. प्र. हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रशस्ति पत्र 2004, गौरापन्त शिवानी सम्मान 2005, ज्ञान भारती सम्मान 2008, रायबरेली, निराला सम्मान 2010, महादेवी वर्मा सम्मान 2011, गुलशन नंदा सम्मान 2011, सरस्वती सम्मान 2012 से सम्मानित की गयीं हैं।

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