ZAKHM JITNE THE

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-606-8

Author:NIVEDITA

Pages:72

MRP:Rs.125/-

Stock:In Stock

Rs.125/-

Details

निवेदिता की कविताओं की सबसे बड़ी खूबी है अपने आसपास के जीवन को नयी नज़र, नये उल्लास और नयी लालसा से देखना जहाँ चिड़िया, आकाश, नदी, चाँद और सूरज अपनी अतिपरिचित प्राचीनता से मुक्त होकर मानो सृष्टि के आदिम, सर्वप्रथम बिम्बों की तरह प्रगट होते हैं। प्रेम, अनुराग और पूर्णता की आकांक्षा इन कविताओं की एक अतिरिक्त विशेषता है। यहाँ एक गहरा रोमान भी है जो जीवन से गहरे प्रेम से उत्पन्न होता है। निवेदिता की कविताएँ अस्मिता-सिद्धान्त की चौहद्दी में नहीं बँधी हैं। बल्कि वे सम्पूर्ण जीवन की, जीवन से गहरे राग और प्रत्येक क्षण और तृण के उत्सव की कविताएँ हैं। इसीलिए इरोम शर्मीला पर लिखते हुए निवेदिता मुक्ति के स्वप्न को रेखांकित करते हुए भी मूलतः भूख और स्वाद की बात करती हैं - ‘खाने का स्वाद राख में बदल जाता है’ या ‘मैं धरती को कम्बल की तरह लपेट लेती हूँ’। यह एक नयी तरह की राजनीतिक कविता है जहाँ राजनीति भी भूख, स्वाद, वसन्त, कम्बल और नर्म गीली मिट्टी के जरिए अपने को व्यक्त करती है। ‘हर राह से फूटती है पगडंडी’ इस संग्रह की सर्वाधिक जटिल और संश्लिष्ट कविताओं में है जो एक साथ राजनीतिक विकल्प, मानव सम्बन्ध, प्रेम और अतीत की स्मृतियों का संयोजन करती है। निवेदिता का यह संग्रह निश्चय ही सहृदय पाठकों को आकर्षित करेगा और एक बार फिर कविता पढ़ते हुए उन्हें वो संगीत और रोमान मिलेगा जो कविता का सबसे खास गुण होता है।

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NIVEDITA

NIVEDITA 4 अप्रैल 1965 में बिहार के गया में जन्मी निवेदिता ने अपने सफर की शुरुआत रंगमंच और छात्र आन्दोलन से की। पटना विश्वविद्यालय से राजनीतिशास्त्र में एम.ए. किया। माँ इन्दु रानी झा, पिता नीतिरंजन झा की पहली सन्तान। पत्रकारिता का लम्बा अनुभव। विभिन्न अखबारों नवभारत टाइम्स, आज, राष्ट्रीय सहारा, नई दुनिया में कई वर्षों तक काम किया। अभी स्वतन्त्र पत्रकार के रूप में दिल्ली, पटना से प्रकाशित होने वाले दर्जनों पत्र-पत्रिकाओं में लेखन का काम जारी। फिलहाल ग्रीन पीस इंडिया में मीडिया कंसलटेंट के रूप में कार्यरत। महिला मुद्दों पर बेहतरीन पत्रकारिता के लिए उन्हें 2010-11 का लाडली मीडिया अवार्ड एवं वन वर्ल्ड अक्षयपात्रा मीडिया अवार्ड 2012 मिला। नेशनल फाउंडेशन ने 1997 में बच्चों की स्थिति पर काम करने के लिए मीडिया फेलोशिप दिया। यूएनएफपीए के तहत विजनरी लीडरशिप फेलोशिप 2004 में मिला। बालिका शोषण की अनकही कहानी - 1999 में बुक फॉर चेन द्वारा प्रकाशित की गयी। केन्या, फिलीपींस, पाकिस्तान, बंगलादेश, नेपाल, भूटान, अरब अमीरात में यात्रा करने के बाद पटना में रह रही हैं।

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