VIBHAS

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-597-9

Author:ED. YATINDRA MISHRA

Pages:88

MRP:Rs.125/-

Stock:In Stock

Rs.125/-

Details

प्रसिद्ध युवा हिन्दी कवि व संगीत अध्येता यतीन्द्र मिश्र का नया कविता-संग्रह ‘विभास’ कबीर की बानी को समकालीन अर्थों में नये सिरे से खोजने और अपनी अभिव्यक्ति के लिए एक नया बेहद रचने की कोशिश है। कबीर के प्रसिद्ध प्रतिबिम्बों से यतीन्द्र कुछ नया बनाते हैं हमारे ज़माने के लिए। आज के ज़माने में अगर कबीर होते तो उनकी कविता का स्वर आज किस ढंग से समकालीन प्रत्ययों के साथ हमसे मुख़ातिब होता। नयी शब्दावली और नये प्रश्नों के तहत कबीर की माया को पकड़ने की कोशिश है ‘विभास’। कबीर के ओज के सामने खड़े होने वाले से बनने वाली परछाई रोशनी की ही बनती है, अन्धेरे की नहीं। इसी रोशनी की परछाई से उपजा है ‘विभास’। ‘विभास’ की कविताओं में कबीर मात्र ‘विषय’ नहीं है। यतीन्द्र यहाँ बेहद रोचकता से अपनी भाषा की ऐसी माटी गढ़ पाते हैं जिससे कबीर की कबीरियत और यतीन्द्र की क़ाबिलियत स्वयं ही प्रकट होती है।

Additional Information

माँ तो अब हैं नहीं...। लेकिन आँगन में पड़ी उनकी खड़ाऊँ अगर एक पर दूसरी चढ़ जाये तो हम झुक के, हाथ से उसे सीधा कर देते हैं। रसोई में गिरी चम्मच, चिमटा, उनकी याद दिला देता है... उनकी छड़ी दिख जाये तो आँचल से पोंछ के, अल्गनी पर टाँग देते हैं। मुस्कुरा लेते हैं, ये सोच के, कि कितनी बार पिटे तो हाथ से पकड़ ली थी...! उनका कड़ा बड़े होकर भी हमारी कलाई से बड़ा है। माथे से छू के, पूजा के स्थान पर रख देते हैं... यतीन्द्र ने ऐसा ही कुछ किया है। ‘कबीर’ की बिखरी हुई सामग्री को सँभाल लिया है... वो सारी चीज़ें अपनी कविताओं में जमा कर दी हैं ताकि अनुभव और उपज की कड़ी टूटे नहीं। -गुलज़ार

About the writer

ED. YATINDRA MISHRA

ED. YATINDRA MISHRA यतीन्द्र मिश्र हिन्दी कवि, सम्पादक और संगीत अध्येता हैं। उनके अब तक तीन कविता-संग्रह, शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी, नृत्यांगना सोनल मानसिंह एवं शहनाई उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ पर हिन्दी में प्रामाणिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। प्रदर्शनकारी कलाओं पर निबन्धों की एक किताब ‘विस्मय का बखान’ तथा कन्नड़ शैव कवयित्री अक्क महादेवी के वचनों का हिन्दी में पुनर्लेखन ‘भैरवी’ नाम से प्रकाशित हुआ है। वरिष्ठ कवि कुँवरनारायण पर एकाग्र तीन पुस्तकों क्रमशः कुँवरनारायण - ‘संसार’ एवं ‘उपस्थिति’, ‘कई समयों में’ एवं ‘दिशाओं का खुला आकाश’, अशोक वाजपेयी के गद्य का एक संचयन ‘किस भूगोल में किस सपने में’ तथा अज्ञेय काव्य से एक चयन ‘जितना तुम्हारा सच है’ प्रकाशित हैं। साथ ही, फ़िल्म निर्देशक एवं गीतकार गुलज़ार की कविताओं एवं गीतों के चयन क्रमशः ‘यार जुलाहे’ तथा ‘मीलों से दिन’ नाम से सम्पादित हैं। ‘गिरिजा’ का अंग्रेजी, ‘यार जुलाहे’ का उर्दू तथा अयोध्या शृंखला कविताओं का जर्मन अनुवाद प्रकाशित हुआ है। उन्हें रज़ा पुरस्कार, भारत भूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार, भारतीय भाषा परिषद युवा पुरस्कार, हेमन्त स्मृति कविता सम्मान सहित भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की कनिष्ठ शोधवृत्ति एवं सराय, नयी दिल्ली की स्वतंत्र शोधवृत्ति मिली हैं। साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों हेतु भारत के प्रमुख नगरों समेत अमेरिका, इंग्लैण्ड, मॉरीशस एवं अबु धाबी की यात्राएँ की हैं। अयोध्या में रहते हैं तथा समन्वय व सौहार्द के लिए विमला देवी फाउण्डेशन न्यास के माध्यम से सांस्कृतिक गतिविधियाँ संचालित करते हैं।

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