YE AAM RASTA NAHIN

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5072-357-9

Author:VINOD BHARDWAJ

Pages:152

MRP:Rs.150/-

Stock:In Stock

Rs.150/-

Details

‘‘सिंहासन पर बैठी मृदु ने सोचा... सुरक्षाकर्मी अपने भालों से सिंह को मार देंगे।’’ यही स्वप्न तो यथार्थ है। रजनी गुप्त ने ‘ये आम रास्ता नहीं है उपन्यास में बड़ी खूबसूरती से इसी रूपक को उकेरा है। ‘यत्र नार्यिस्तु पूज्यन्ते’ का साक्षात् रूपक। स्त्री सिंहासन पर बैठी है, दोनों तरफ सिंह है, भाले ताने सुरक्षाकर्मी खड़े हैं। (सबसे बड़ा भ्रम है कि यह ताम-झाम उसके लिए है। नहीं। यह सब तो मौका ताक, उसे मार डालने के लिए है।... जैसा इन्दिरा गाँधी के साथ हुआ)। उपन्यास एक स्त्री मृदु की महत्त्वाकांक्षा की कहानी भर नहीं है, हर स्त्री की छोटी-बड़ी महत्त्वाकांक्षा की कहानी है। प्राकृतिक, अर्जित, सब गुण हैं मृदु में। लेकिन उन्हें कोई सार्थक दिशा देने के स्थान पर भाई उसे अनुशासित करता है और शीघ्र ही उसका विवाह भी अयोग्य व्यक्ति से हो जाता है। पति उसे सहचर नहीं, वस्तु समझता है। मृदु उसकी उन्नति के लिए काम करे तो बहुत अच्छा, स्वयं के लिए कुछ सोचे तो नीच, कुलटा, बेहया! पति ही क्यों हर पुरुष यही करता है। गजेन्द्र से लेकर सुकाम तक, हर व्यक्ति स्त्री को प्राकृतिक संसाधन मान, उसका दोहन करना चाहता है। राजनीति का तिलिस्म बिरला ही तोड़ पाता है। वहाँ केवल समझौते हैं। वरिष्ठ राजनेत्री का भी यही अनुभव है। ‘‘गिल्ट मत पालो’’ ये आम रास्ता नहीं है, केवल खास व्यक्तियों के लिए सुरक्षित है। दादा-परदादा के जमाने से राजनीति चल रही हो या बेशुमार दौलत हो (कुर्सी खरीदने के लिए)। बाकी जो आम लोग हैं, विशेषकर स्त्रियाँ, अपनी एकमात्र सम्पत्ति देह को दाँव पर लगाने के लिए तैयार रहें। रजनी गुप्त का भाषा प्रांजल्य और उपन्यास की बुनावट पर अच्छा नियन्त्रण है। कथ्य अत्यन्त रोचक व ज्वलन्त है। क्यों यह रास्ता स्त्रियों के लिए बन्द है?

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About the writer

RAJNI GUPT

RAJNI GUPT रजनी गुप्त का जन्म 2 अप्रैल, 1963, चिरगाँव, झाँसी (उ.प्र.) में हुआ। जे.एन.यू., नयी दिल्ली से उन्होंने एम.फिल., पीएच. डी. की शिक्षा प्राप्त की। इनकी प्रकाशित कृतियाँ हैं - कहीं कुछ और, किशोरी का आसमाँ, एक न एक दिन, कुल जमा बीस (उपन्यास); एक नयी सुबह, हाट बाजार, दो कहानी संग्रह शीघ्र प्रकाश्य (कहानी संग्रह); आजाद औरत कितनी आजाद, मुस्कराती औरतें, आखिर क्यों व कैसे लिखती हैं स्त्रियाँ (सम्पादन); सुनो तो सही (स्त्री विमर्श)। रजनी गुप्त ‘कहीं कुछ और’ उपन्यास राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन ओपन यूनिवर्सिटी (उ.प्र.) के स्त्री विमर्श के पाठ्यक्रम एवं ‘सुनो तो सही’ हिन्दी साहित्य के इतिहास में शामिल रही हैं। पिछले 13 सालों से ‘कथाक्रम’ साहित्यिक पत्रिका में सम्पादकीय सहयोग दिया है। रजनी गुप्त को ‘एक नयी सुबह’ पर उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का सर्जना पुरस्कार एवं युवा लेखन पुरस्कार, किताब घर प्रकाशन द्वारा आर्यस्मृति साहित्य सम्मान 2006, ‘किशोरी का आसमां’ उपन्यास पर उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा अमृतलाल नागर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। रजनी गुप्त राष्ट्रीयकृत बैंक में प्रबन्धक के पद पर हैं।

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