SAMKALEEN HINDI KAHANI : BADLATE JEEVAN-SANDARBH

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-365-4

Author:SHAILJA

Pages:168

MRP:Rs.495/-

Stock:In Stock

Rs.495/-

Details

साहित्य के इतिहास में समकालीनता एक मूल्यवाचक अवधारणा है। यों काल से भी इस अवधारणा का संबंध है, लेकिन मूलतः है यह मूल्यबोधक ही। भविष्यदृष्टि और जीवन-संदर्भ के परिवर्तित रूप, ये दो इसके प्रमुख आयाम हैं। जीवन-संदर्भों में निरंतर आने वाले इन्हीं परिवर्तनों पर आधारित होती है, समकालीनता की अवधारणा। कला या साहित्य अपने मूल उद्देश्य में इन्हीं बदलते जीवन-संदर्भों का आकलन है। जीवन-जगत के परिवर्तनों के साथ-साथ बदलते जाते हैं मानवीय रिश्ते और उसी के समानांतर साहित्य-सृजन में भी परिवर्तन आता जाता है। साठोत्तर भारत घटनाओं के परिवर्तनों का एक प्रकार से ऐतिहासिक कालखंड प्रमाणित हुआ। राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक इन परिवर्तित घटनाओं ने भारत के आम आदमी को अपने-अपने जीवन-क्षेत्र में और अधिक सक्रिय संघर्षमय और तल्लीन होने के लिए विवश किया। यही कारण हुआ कि अपनी विरासत के बहुमूल्य तत्वों को जहाँ समकालीन कहानीकारों ने विविध प्रकार के कथ्यों के द्वारा निरंतर विकसित किया वहीं दूसरी ओर अपने समय की दुर्बलताओं पर भी तीखे प्रहार किये। व्यंग्य जो कभी शैली हुआ करता था, वह अब वस्तु रूप में विकसित हुआ। कुरूपताओं और दुर्बलताओं को साहित्य तो उजागर करता ही रहा है। समकालीन कहानीकारों ने इससे आगे बढ़कर उनके प्रति आक्रोश का भाव भी दर्शाया। परिवर्तनकारी जीवन-संदर्भों के लिए प्रयत्नशील समकालीन रचनात्मकता से अधिक किस दौर में और अधिक रुझान देखा गया, इसका इतिहास उपलब्ध नहीं है। इस पुस्तक में बदलते जीवन-संदर्भ की इसी क्रांतिकारी भूमिका को आकलित और विकसित करने में समकालीन हिंदी कहानी ने किस प्रकार सर्जनात्मक उद्यम किया है, उस पर वैज्ञानिक रूप से विचार किया गया है।

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About the writer

SHAILJA

SHAILJA काशी में जन्मी शैलजा ने हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी से तथा वर्धमान विश्वविद्यालय, वर्धमान (पश्चिम बंगाल) से शिक्षा प्राप्त की। महत्वपूर्ण साहित्यिक पत्रिकाओं में इनके शोध आलेख प्रकाशित हैं। वर्तमान समय में दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री गुरु नानक देव खालसा कॉलेज में अध्यापन में व्यस्त हैं।

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