UMEED KA DOOSARA NAAM

Format:Paper Back

ISBN:81-8143-223-1

Author:ASHOK VAJPEYI

Pages:84

MRP:Rs.75/-

Stock:In Stock

Rs.75/-

Details

उम्मीद का दूसरा नाम

Additional Information

हमारे अँधेरे और हिंसक समय में लगभग ज़िदकर प्रेम की भी कविता लिखनेवाले अशोक वाजपेयी प्रेम को जिजीविषा और उम्मीद का दूसरा नाम मानते हैं। सारे समय को अतिक्रमित कर प्रेम अपना अनन्त रचना और उसमें रमता है। अशोक वाजपेयी की कविता इस रचाव और रमाव का निस्संकोच उत्सव है। सामाजिकता से अनेक स्तरों पर आक्रान्त युग में यह निजता पर आग्रह है। यह याद दिलाना है कि हमारी मानवीयता अगर समवाय में अर्थ पाती है तो अन्तरंग संबंधों में ही खिलती और पूर्ण होती है। 'प्रेम की असम्भव संस्कृत में हिन्दी में इस समय संभवत सबसे ऐन्द्रिय कविता लिखनेवाले अशोक वाजपेयी का यह बारहवाँ संग्रह है जिसमें उनकी 2003 में लिखी प्रेम-कविताएँ एकत्र है।

About the writer

ASHOK VAJPEYI

ASHOK VAJPEYI अशोक वाजपेयी हिन्दी कवि-आलोचक, अनुवादक, सम्पादक तथा भारत की एक बड़ी सांस्कृतिक उपस्थिति हैं। कविता की 13 पुस्तकों, आलोचना की 7 पुस्तकों और अंग्रेजी में कला पर 3 पुस्तकों सहित उन्हें संस्कृति के विशिष्ट प्रसारक और नवोन्मेषी संस्था निर्माता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने भारतीय और विदेशी संस्कृतियों के मध्य परस्पर जागरूकता और आपसी संवाद को बढ़ाने के लिए अथक प्रयास किया है। कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं के सम्पादक के रूप में उन्होंने कविता और आलोचना में युवा प्रतिभाओं और समकालीन तथा शास्त्रीय कलाओं की आलोचनात्मक जागरूकता का प्रसार करने के लिए अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। वे साहित्य, संगीत, नृत्य, नाटक, दृश्यकलाओं, लोक एवं जनजातीय कलाओं, सिनेमा आदि से सम्बन्धित हजारों कार्यक्रमों के आयोजक रहे हैं। उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार, दयावती कवि शेखर सम्मान, भारत भारती और कबीर सम्मान प्रदान किये गये हैं। उनके काव्य संकलनों के अनुवाद अंग्रेजी, फ्रांसीसी, पोलिश, उर्दू, बांग्ला, गुजराती, मराठी और राजस्थानी में हुए हैं। भारत के एक विशिष्ट बुद्धिजीवी श्री वाजपेयी एक सृजनात्मक विश्व पर्यटक हैं, जिन्होंने सम्मेलनों में भाग लेने, व्याख्यान देने के क्रम में कई बार यूरोप आदि का भ्रमण किया है। उन्होंने पोलैण्ड के चार प्रमुख कवियों-चेस्लाव मीलोष, वीस्वावा षिम्बोस्र्का, ज़्बीग्न्येव हेर्बेर्त और तादेऊष रूज़ेविच की कृतियों का हिन्दी अनुवाद किया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा से निवृत्त होने के बाद वह दिल्ली में रह रहे हैं। उन्हें पोलैण्ड गणराज्य के राष्ट्रपति द्वारा और फ्रांसीसी सरकार द्वारा अपने उच्च सिविल सम्मानों से विभूषित किया गया है।

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