PHIR MUJHE 'RAHGUJAR YAAD AAYA'

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5072-570-2

Author:SHAILENDRA SAGAR

Pages:215

MRP:Rs.395/-

Stock:In Stock

Rs.395/-

Details

फिर मुझे 'राहगुज़र याद आया'

Additional Information

नवाबी शहर रामपुर पर केन्द्रित यह स्मृति आख्यान समष्टि से व्यष्टि तक की सुदीर्घ यात्रा तय करता हुआ विगत और वर्तमान की आवाजाही का जीवन्त दस्तावेज बनता जाता है। सामूहिकता बनाम निजता एवं पुरातन बनाम नवीन के द्वन्द्व से गुंथी कथा में ऐतिहासिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ विभिन्न सम्प्रदायों के बीच गहराई से पैठे सौहार्द को पूरी आत्मीयता से उकेरा गया है। एक छोटे शहर के जरिए तत्कालीन समय, समाज, सभ्यता, संस्कृति और जीवन मूल्यों से जुड़े बारीक ब्योरों के साथ पात्रों के बीच का आत्मीय संलाप व पूरी तल्लीनता से उकेरे रिश्तों के शब्द चित्र देखते ही बनते हैं। आज के आत्मकेन्द्रित और व्यक्तिवादी परिवेश में यह स्मृति आख्यान पाठकों की स्मृति में दस्तक देते हुए संक्रमणशील समय को पूरे पैनेपन से उभारता है। कभी असगर अली जैसे नेक पात्र के जरिए आम आदमी के भीतर गहराई तक पैठे इनसानियत के जज्बे को जिन्दा किया गया है तो कभी एक स्वप्नदर्शी किशोर से परिपक्व होने तक की लम्बी अवधि पार करती कथा समूचे उत्तरभारतीय जनजीवन का केन्द्रक बन कर विगत और वर्तमान की जुगाली करने लगती है। स्मृति संजाल से गुंथी कथा पूरी रोचकता, हार्दिकता व गजब की पठनीयता से भरपूर है जिसके सम्मोहक कथारस की जादुई गिरफ्त में पाठक जकड़ता जाता है।

About the writer

SHAILENDRA SAGAR

SHAILENDRA SAGAR जन्म : 5 अप्रैल 1951 को रामपुर उ.प्र. में। अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. करने के बाद तीन वर्ष का अध्यापन, 1974 में उ.प्र. राज्य सिविल सर्विस में चयन और वर्ष 1976 से आईपीएस में सेवा। 2010 में पुलिस महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लगभग सौ कहानियां, लघुकथाएँ प्रकाशित। अब तक तीन उपन्यास (चतुरंग, चलो दोस्त सब ठीक है व एक सुबह यह भी) और पाँच कहानी संग्रह प्रकाशित। स्त्री विमर्श पर दो पुस्तकों का सम्पादन। कहानी संग्रह ‘माटी' पर विजय वर्मा सम्मान व उ.प्र. हिन्दी संस्थान द्वारा पुरस्कृत, उपन्यास 'चलो दोस्त सब ठीक है' पर उ.प्र. हिन्दी संस्थान का प्रेमचन्द सम्मान एवं कथाक्रम पत्रिका पर सरस्वती सम्मान। 1998 से प्रमुख साहित्यिक त्रैमासिकी ‘कथाक्रम' का नियमित सम्पादन।

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