SAAT SURON KE BEECH

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5072-682-2

Author:Sunita Budhiraja

Pages:228

MRP:Rs.495/-

Stock:In Stock

Rs.495/-

Details

वाणी प्रकाशन से प्रकाशित वरिष्ठ लेखिका सुनीता बुद्धिराजा की नयी पुस्तक ‘सात सुरों के बीच’ में उन प्रतिष्ठित, लोकप्रिय कलाकारों की बानगी, अभिव्यक्ति, शैली को संजोया गया है जिनका नाम अपनी ज़ुबान पर लाते हुये बड़ी बड़ी हस्तियों का हाथ अपने कानों पर चला जाता है उनको एक आदर भाव देने के लिए। बिस्मिल्लाह खाँ साहब, पं. किशन महाराज, पं. जसराज, मंगलमपल्ली डॉ. बालमुरली कृष्ण, पं. शिवकुमार शर्मा, पं. बिरजू महाराज एवं पं. हरिप्रसाद चौरसिया जी के साथ किये गये सुर-संवाद इस पुस्तक की धड़कन हैं। सात सुरों के बीच के रचयिता सुनीता बुद्धिराजा स्वयं को सौभाग्यशाली मानती हैं कि इतने महान और बड़े कलाकारों के साथ एक ही जीवन-काल में परिचय और उनके साथ मधुर संबंध बनाने का अवसर उन्हें मिला। जैसे इन महान कलाकारों ने, विभूतियों ने अपने संगीत को सबके साथ बाँटा है उसी प्रकार सुनीता बुद्धिराजा ने उनके साथ हुये संवाद और अनुभव को इस पुस्तक के माध्यम से हम सबसे बाँटा है।

Additional Information

सच में, संगीत किसी एक का नहीं होता, एक के लिए नहीं होता। मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानती हूँ कि इतने महान और बड़े कलाकारों के साथ एक ही जीवन-काल में परिचय और उनके साथ मधुर संबंध बनाने का अवसर मुझे मिला है। उनके स्वरों का स्पर्श मुझ जैसी व्यक्ति को अपने ही ऊपर गर्व करने का लालच देता है। ऐसे में, जब वर्षों के जुड़ाव में उन सभी महान कलाकरों के साथ किया गया सुर-संवाद, मैं काग़ज़ पर उतारने बैठी तो वह कैसा रूप लेगा, मुझे पता न था। उसका कारण था कि यह बातचीत, यह संवाद कभी इस भाव से नहीं किया गया था कि इसे पुस्तक रूप देना है, बस मैं तो कुछ क्षणों को संजोना चाहती थी, मन की सुंगध में उतारना चाहती थी। जैसे इन कलाकारों ने, विभूतियों ने, अपने संगीत को सबके साथ बाँटा है, तो मैं भी अपने सुर-संवाद, अपने अनुभव को, आपके साथ इस पुस्तक के माध्यम से बाँटने का प्रयास कर रही हूँ। प्रस्तुत पुस्तक ‘सात सुरों के बीच’ में मैंने कलाकारों की बानगी को, उनकी अभिव्यक्ति को उन्हीं की शैली, उन्हीं के शब्दों में रखने का प्रयास किया है। केवल उनका खाका मेरा है। आप उनके स्वरों के साथ-साथ उनके शब्दों की सुंगध को भी वैसा ही महसूस कर सकें, जैसा मैंने किया था, यह इच्छा रही और इस सारी प्रक्रिया में 15 वर्ष लग गये। ये संवाद कोई एक बार का या एक स्थान का नहीं है। इसमें कई वसंत आये और चले गये, ऋतुएँ बदल गयीं। लेकिन कभी तो इसे समेटना था। इस समेटने में कुछ विभिूतियाँ ब्रह्मलीन हो गयीं। उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ जिनके साथ यह सुर-संवाद आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्त्वपूर्ण होगा, पं. किशन महाराज, उस्ताद विलायत खाँ साहब और पं. भीमसेन जोशी जिनकी चर्चा इनमें अनेक बार हुई है, इनमें सम्मिलित हैं। प्रस्तुत पुस्तक में प्रमुख रूप से बिस्मिल्लाह खाँ साहब, पं. किशन महाराज, पं. जसराज, मंगलमपल्ली डॉ. बालमुरली कृष्ण, पं. शिवकुमार शर्मा, पं. बिरजू महाराज एवं पं. हरिप्रसाद चौरसिया जी के साथ किया गया सुर-संवाद शामिल है, किंतु देश के अन्य प्रमुख कलाकारों की झलक भी संवाद के माध्यम से पुस्तक में बिखरी मिलेगी। आशा करती हूँ कि मेरे प्रस्तुत प्रयास को आप सहृदय स्वीकार करेंगे। - सुनीता बुद्धिराजा

About the writer

Sunita Budhiraja

Sunita Budhiraja वर्षों तक सुरीले व्यक्तियों को सुनते-सुनते, सुनीता का कान सुरीला हो गया। उठते-बैठते संगीत को सुनना आदत-सी हो गयी। चूँकि मंच संचालन का शौक था, इसलिए संगीतकारों से भेंट-मुलाकात का सिलसिला शुरू हो गया। जानने की उत्सुकता ने सुनीता को हरदम अपने पास एक छोटा टेप-रिकार्डर या डिक्टाफ़ोन रखने की आदत डाल दी। जब, जहाँ सम्भव हुआ, कलाकारों के साथ बातचीत रिकार्ड कर ली। सात सुरों के बीच इसी आदत का परिणाम है। कलाकारों से अत्यधिक स्नेह मिला। सुनीता स्वयं को भाग्यशाली समझती हैं कि उन्होंने ऐसे युग में जन्म लिया जब संगीत की इतनी महान विभूतियों को व्यक्तिगत रूप से जानने और उन्हें सुनने का अवसर उन्हें मिला है। कविता, साक्षात्कार और यात्रा-वृत्तान्त लिखना भी सुनीता को अच्छा लगता है। सबसे अच्छा लगता है पढ़ना और संगीत सुनना। सुनीता का व्यवसाय है- जनसम्पर्क। उनकी पुस्तकें- आधी-धूप, अनुत्तर तथा प्रश्न-पांचाली (तीनों कविता संकलन) काफ़ी चर्चित हुई हैं। प्रश्न-पांचाली का मंचन-निर्देशन विख्यात रंग-निर्देशक दिनेश ठाकुर ने किया है। टीस का सफ़र साक्षात्कारों पर आधारित पुस्तक है, जिसका अनुवाद तेलुगु में हो चुका है। सुनीता ने चार काफ़ी टेबल बुक्स का भी सम्पादन किया है, जिनमें से दो आन्ध्र प्रदेश, एक कर्नाटक तथा एक डॉ. विजय माल्या के सम्बन्ध में है।

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