PANDAVPURAM

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5072-690-7

Author:SETHU

Pages:112

MRP:Rs.125/-

Stock:In Stock

Rs.125/-

Details

पाण्डवपुरम के रास्तों की धूल पर पगचिद्द छोड़ता स्वस्थ युवक आता है, पाण्डवपुरम का एक और जार। देवी उसको भी जादू से खींच लेगी। परास्त कर देगी। समय व्यतीत होने पर वह भी रास्ते की धूल बनेगा और कमरे में अनेकानेक गन्धों की धूल का अम्बार लग जाएगा। विविध आकार की हड्डियाँ बिखर जाएँगी। देवी खुले बाल और हाथ में मुंडों की माला लेकर चामुण्डा के समान नाचेगी। पाण्डवपुरम की गलियों में अनाथ लड़कियों की जिन्दगी बरबाद करने के लिए जार लोग मदहोशी में आते रहेंगे। देवी पहाड़ के ऊपर समाधिस्थ, मन्दिर में लाल वस्त्र पहनकर, माथे पर सिन्दूर लगाकर आसन मारकर बैठी है। पाण्डवपुरम आने वाली हरेक स्त्री देवी से प्रार्थना करती है कि जारों के मायाजाल से हमारी रक्षा करें। स्त्री-पुरुष सम्बन्धों को एक नयी दृष्टि से परखता व स्त्री अस्मिता के सन्दर्भ में नयी सोच एवं जिज्ञासाएँ जगाने की क्षमता रखने वाला यह उपन्यास फैंटेसी के माध्यम से हमें एक नयी दुनिया की ओर ले जाता है।

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About the writer

SETHU

SETHU सन् 1942 में चेंदमंगलम, जिला एरणाकुलम में जन्मे सेतुमाधवन (सेतु) ने तीस से अधिक पुस्तकों की रचना की है। सेतु जी साउथ इंडियन बैंक के चेयरमैन भी रहे हैं। केन्द्रीय साहित्य अकादेमी पुरस्कार, वलयार पुरस्कार, केरल साहित्य अकादेमी पुरस्कार, मुट्टत्तुवर्की पुरस्कार, मलयाट्टूर पुरस्कार, विश्वदीपम पुरस्कार, पद्मराजन पुरस्कार, ओटकुषल पुरस्कारों सहित अनेकानेक पुरस्कारों से पुरस्कृत हो चुके हैं। सम्प्रति नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं।

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