GEET FAROSH : SAMVEDANA AUR SHILP

Format:

ISBN:81-7055-364-4

Author:DR. SMITA MISHRA

Pages:

MRP:Rs.65/-

Stock:Out of Stock

Rs.65/-

Details

गीतफरोश से संवेदना सहज और व्यापक है। भवानीप्रसाद मिश्र किसी बाद में सिमटकर चलने वाले संकीर्ण कवि नहीं हैं। वे खुले हुए कवि हैं। बाहर मनुष्य और प्रकृति का जो भी रूप उन्हें प्रभावित करता है उसे खुली आँखों से देखते हैं और उसके साथ एक सहज रागात्मक लगाव निर्मित कर लेते हैं। इसे हम यों भी कह सकते हैं कि उन्हें मुनष्य और प्रकृति से गहरा प्यार है। उस प्यार में एक खुलापन है एक गति है। इस तरह इनकी कविताओं में मनुष्य और प्रकृति का एक ओर विविध रूपविधान है तो दूसरी ओर उससे जुड़ी हुई विविध रागात्मक प्रतिक्रियाएँ। यानी सौन्दर्य का भीतरी और बाहरी संसार एक-दूसरे से संवाद करता हुआ चलता रहता है। मिश्रजी अपने समय के प्रति सचेत कवि हैं। अअतः उनमंे सामाजिक और राजनीतिक प्रश्नों से जुड़ा हुआ चिन्तन भी चलता रहता है। वे गाँधीवादी दर्शन से प्रभावित कवि हैं। इसीलिए उनकी राजनीतिक और सामाजिक चिन्तन के केन्द्र में सामान्य मनुष्य का हित रहता है। यानी सामान्य मनुष्य के सुख-दुख को केन्द्र में रखने के कारण उनकी राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि मूल्य-दृष्टि बन जाती है। भवानी भाई लोक-प्रकृति, लोक-जीवन से जुड़े हुए कवि हैं। अतः उनमें लोक-जीवन की सांस्कृतिक-चेतना तथा यथार्था छवियों के दर्शन होते हैं।

Additional Information

No Additional Information Available

About the writer

DR. SMITA MISHRA

DR. SMITA MISHRA डॉ. स्मिता मिश्र, जन्म: 21 जुलाई 1966 को दिल्ली में। शिक्षा: एम.ए., पी-एच.डी. लेखन: कविता, आलोचना, खेल पत्राकारिता सम्प्रति: दिल्ली विश्वविद्यालय में हिन्दी की प्रवक्ता प्रकाशन: (1) भारतीय गाँव बदलते सन्दर्भ (हिन्दी के आंचलिक उपन्यासों के परिप्रेक्ष्य में) (2) समीक्षात्मक निबन्ध (3) खेल सम्बन्धी अनेक लेख सम्पादन-गद्य विविधा -रामदरश मिश्र समग्र (यन्त्रास्थ) -मेरे साक्षात्कार (रामदरश मिश्र से लिये गये साक्षात्कारों का संग्रह) (यन्त्रस्थ)

Books by DR. SMITA MISHRA

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality