MUKUTDHARI CHOOHA

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-769-0

Author:Rakesh Tiwari

Pages:132

MRP:Rs.275/-

Stock:In Stock

Rs.275/-

Details

बाज़ार के ‘विराट’ विस्तार का ‘सूक्ष्म’ प्रभाव, उपभोक्तावाद की चपेट में आये कमज़ोर तबकों की त्रासदी और सामाजिक ताने-बाने से मौक़ापरस्त छेड़छाड़ इन कहानियों का मूल स्वर है। राजनीतिक रंग कुछ कहानियों में मुखर है तो कहीं उसकी छायाएँ साथ चलती हैं। संग्रह की कहानियों में कारुणिक स्थितियाँ अचानक उसी तरह सामने आती हैं जैसे चलते-चलते फोड़े पर रगड़ लग जाए। रोचक क़िस्सागोई की तरह शुरू होने वाली इन कहानियों में परत-दर-परत कई ऐसी गाँठें खुलने लगती हैं जो पाठकों को चौंकाती चली जाती हैं। ये सिर्फ़ त्रासदी के साथ खत्म होने वाली कहानियाँ नहीं हैं, बल्कि कई बार इनके चरित्र यथार्थ की भयावहता से भिड़ते हैं और अपनी अदम्य जिजीविषा का परिचय देते हैं। कथा-कौशल और भाषा का खिलंदड़ापन पाठक को आद्यन्त बाँधे रखता है। साथ ही अपने समय के प्रश्नों और चुनौतियों से जूझने वाली इन कहानियों का एक व्यापक सामाजिक परिप्रेक्ष्य है। इनमें एक पत्रकार की पैनी नजश्र है, किन्तु पत्रकारीय जल्दबाज़ी नहीं है। ये कहानियाँ पीड़ित व आक्रान्त पक्ष, और खास तौर पर स्त्रियों के आक्रोश को खुल कर ‘डिफेंड’ करतीं अथवा उन्हें ग़ुस्सा दिलाती हैं। कहानियों में ‘कॉमिक’ स्थितियाँ कई बार गुदगुदाती लगती हैं, लेकिन हमारे समय और व्यवस्था को लेकर गहरा व्यंग्य इनमें छुपा है।

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About the writer

Rakesh Tiwari

Rakesh Tiwari उत्तराखंड के गरमपानी (नैनीताल) में जन्म। एक समय सारिका, धर्मयुग, रविवार, साप्ताहिक हिन्दुस्तान से लेकर तमाम पत्र-पत्रिकाओं में कहानियों के प्रकाशन के साथ चर्चित। लम्बी खामोशी के बाद फिर से कथा-लेखन में सक्रिय और इधर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित कहानियों से फिर चर्चा में। कुछेक कहानियों का अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद। एक कहानी पर फिल्म बनी है और एक कहानी के नाट्य-रूपान्तरण के बाद कई शहरों में नाट्य प्रस्तुतियाँ। कुछ कहानियाँ अन्य लेखकों द्वारा सम्पादित संग्रहों में शामिल। व्यंग्य सहित साहित्य की दूसरी विधाओं के अलावा बाल साहित्य लेखन भी। शुरुआती दौर में रंगकर्म और पटकथा लेखन से भी नाता। छिटपुट तौर पर पत्राकारिता का अध्यापन और अनुवाद कार्य भी। पहला कहानी संग्रह ‘उसने भी देखा’ (1993) और एक बाल उपन्यास ‘तोता उड़’ प्रकाशित। एक उपन्यास और पत्राकारिता पर एक पुस्तक का प्रकाशन शीघ्र ही। लम्बे समय से पत्राकारिता में रहते हुए राजनीति, खेल, कला, फिल्म, पर्यावरण, जनान्दोलन और अन्य समसामयिक मुद्दों पर लेखन और रिपोर्टिंग। साहित्यिक-सांस्कृतिक रिपोर्टिंग को नया आयाम और नये तेवर देने वाले पत्राकार के रूप में विशिष्ट पहचान। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में घुसपैठ और ताकझाँक के विविध अनुभव। वर्तमान में इंडियन एक्सप्रेस समूह के दैनिक जनसत्ता में विशेष संवाददाता।

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