AADHUNIK KAHANI : ROOS

Original Book/Language: आधुनिक कहानी: रूस इवान याकोव्लेविच ने शराफष्त के तकाजे से कमीजष् के ऊपर गाऊन पहना, खाने की मेजष् पर बैठकर डबलरोटी पर नमक छिड़का, प्याजष् के छिलके उतारे, हाथ में चाकू लिया और बड़ी अदा से डबल रोटी काटने लगा। डबल रोटी को बीचोबीच दो टुकड़ों में काटकर उसने उसे ध्यान से देखा और हैरान रह गया। डबल रोटी के बीच में कोई सफष्ेद चीजष् चमक रही थी। इवान निकोलायेविच ने उँगली से छूकर देखा, ठोस है, वह बुदबुदाया। ”ये कौन-सी चीजष् हो सकती है?“ उसने उँगलियों से उसे खींचकर बाहर निकालाµ नाक। ...इवान निकोलायेविच के हाथ ढीले पड़ गये, वह आँखें फाड़-फाड़ कर टटोलता रहा। नाक, बिल्कुल नाक। और तो और, जानी पहचानी है। इवान निकोलायेविच के चेहरे पर भय की लहर दौड़ गयी। मगर यह भय उस हिकारत के मुकाबले में कुछ भी नहीं था, जिससे उसकी बीवी उसे देख रही थी। अरे जानवर, किसकी नाक काट लाये? वह गुस्से से चीखीµगुण्डे, शराबी! मैं खुद पुलिस में तुम्हारी रिपोर्ट करूँगी, डाकू कहीं के। मैं तीन आदमियों से सुन चुकी हूँ कि तुम दाढ़ी बनाते समय इतनी लापरवाही से नाक के पास चाकू घुमाते हो कि उसे बचाना मुश्किल हो जाता है। मगर इवान निकोलायेविच तो जैसे पथरा गया था। वह समझ गया था कि यह नाक सुपरिंटेंडंेट कोवाल्योव की है, जिसकी वह हर बुधवार और इतवार को दाढ़ी बनाया करता था।

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-838-6

Author:AMRIT MEHTA

Translation:अमृत मेहता जन्म: 1946 ई., मुलतान में। हिन्दी, जर्मन, अंग्रेजष्ी, पंजाबी तथा इतालवी भाषाओं का ज्ञान। जर्मन साहित्य में डॉक्टर की उपाधि। जर्मन विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चण्डीगढ़ में तथा अनुवाद विज्ञान विभाग, केन्द्रीय अंग्रेजष्ी एवं विदेशी भाषा संस्थान, हैदराबाद में अध्यक्ष के पद पर कार्यरत रहे। विदेशी भाषा साहित्य की त्रौमासिक पत्रिका ‘सार संसार’ के मुख्य सम्पादक। जर्मन साहित्य का अनुवाद। 60 अनूदित पुस्तकें, दो पुस्तकें अनुवाद विज्ञान पर और दो पुस्तकें मूल जर्मन में। निजी साहित्य का स्लोवाक तथा हिन्दी में अनुवाद।

Pages:194

MRP:Rs.395/-

Stock:In Stock

Rs.395/-

Details

आधुनिक कहानी: रूस इवान याकोव्लेविच ने शराफष्त के तकाजे से कमीजष् के ऊपर गाऊन पहना, खाने की मेजष् पर बैठकर डबलरोटी पर नमक छिड़का, प्याजष् के छिलके उतारे, हाथ में चाकू लिया और बड़ी अदा से डबल रोटी काटने लगा। डबल रोटी को बीचोबीच दो टुकड़ों में काटकर उसने उसे ध्यान से देखा और हैरान रह गया। डबल रोटी के बीच में कोई सफष्ेद चीजष् चमक रही थी। इवान निकोलायेविच ने उँगली से छूकर देखा, ठोस है, वह बुदबुदाया। ”ये कौन-सी चीजष् हो सकती है?“ उसने उँगलियों से उसे खींचकर बाहर निकालाµ नाक। ...इवान निकोलायेविच के हाथ ढीले पड़ गये, वह आँखें फाड़-फाड़ कर टटोलता रहा। नाक, बिल्कुल नाक। और तो और, जानी पहचानी है। इवान निकोलायेविच के चेहरे पर भय की लहर दौड़ गयी। मगर यह भय उस हिकारत के मुकाबले में कुछ भी नहीं था, जिससे उसकी बीवी उसे देख रही थी। अरे जानवर, किसकी नाक काट लाये? वह गुस्से से चीखीµगुण्डे, शराबी! मैं खुद पुलिस में तुम्हारी रिपोर्ट करूँगी, डाकू कहीं के। मैं तीन आदमियों से सुन चुकी हूँ कि तुम दाढ़ी बनाते समय इतनी लापरवाही से नाक के पास चाकू घुमाते हो कि उसे बचाना मुश्किल हो जाता है। मगर इवान निकोलायेविच तो जैसे पथरा गया था। वह समझ गया था कि यह नाक सुपरिंटेंडंेट कोवाल्योव की है, जिसकी वह हर बुधवार और इतवार को दाढ़ी बनाया करता था।

Additional Information

अमृत मेहता जन्म: 1946 ई., मुलतान में। हिन्दी, जर्मन, अंग्रेजष्ी, पंजाबी तथा इतालवी भाषाओं का ज्ञान। जर्मन साहित्य में डॉक्टर की उपाधि। जर्मन विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चण्डीगढ़ में तथा अनुवाद विज्ञान विभाग, केन्द्रीय अंग्रेजष्ी एवं विदेशी भाषा संस्थान, हैदराबाद में अध्यक्ष के पद पर कार्यरत रहे। विदेशी भाषा साहित्य की त्रौमासिक पत्रिका ‘सार संसार’ के मुख्य सम्पादक। जर्मन साहित्य का अनुवाद। 60 अनूदित पुस्तकें, दो पुस्तकें अनुवाद विज्ञान पर और दो पुस्तकें मूल जर्मन में। निजी साहित्य का स्लोवाक तथा हिन्दी में अनुवाद।

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