BEES BARAS

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-7055-442-4

Author:DR. RAMDARASH MISHRA

Pages:136

MRP:Rs.200/-

Stock:In Stock

Rs.200/-

Details

बीस बरस

Additional Information

'बीस बरस' की एक खासियत यह है कि यह पूरी तरह गाँव की जमीन पर लिखा गया उपन्यास है। और यह गाँव पूरी तरह वह गाँव नहीं है, जो ‘पानी के प्राचीर' और 'जल टूटता हुआ' के बाद उनसे छूट गया था। यह काफी हद तक एक बदला हुआ गाँव है। और कहीं-कहीं तो यह इस कदर बदल गया है कि उस बदले हुए गाँव के यथार्थ का सामना करने में उपन्यास के कथानायक दामोदर जी को, जो बीस बरस बाद अपने गाँव लौटे हैं, बेहद मुश्किलों तथा कशमकश से गुजरना पड़ता है। आखिरकार इन अनपेक्षित अनुभवों की एक लम्बी श्रृंखला से गुजरकर वे खुद को इस कदर असहज और आहत-किसी कदर अपमानित भी-पाते हैं कि अपनी छुट्टियाँ बीच में ही काटकर वापस दिल्ली लौटने का फैसला कर लेते हैं। जाहिर है, दामोदर जी जो दिल्ली के एक बड़े पत्र ‘नवज्योति' के प्रधान सम्पादक हैं, वे दिल्ली को कोई बड़ा आदर्श नगर नहीं मानते। दिल्ली की बदसूरती और रूखेपन, हृदयहीन कंक्रीटी सच्चाइयों, स्वार्थ और हिंसा से वे बेगाने नहीं है। शायद इसी कारण बरसों तक दिल्ली में रकर भी वे कभी दिल्ली के नहीं हुए और लगातार मन से गाँव में ही रहते हुए, गाँव में साँस लेते रहे। पर बरसों बाद अपने ही गाँव में आने के बाद उन्हें लगा कि यह तो वह गाँव नहीं है, जिसके लिए वे इतना बरसते और तड़पते थे।

About the writer

DR. RAMDARASH MISHRA

DR. RAMDARASH MISHRA रामदरश मिश्र का जन्म 15 अगस्त, 1924 को गोरखपुर जिले के डुमरी गाँव में हुआ। इनके काव्य हैं - पथ के गीत, बैरंग-बेनाम चिट्ठियाँ, पक गई है धूप, कन्धे पर सूरज, दिन एक नदी बन गया, मेरे प्रिय गीत, बाजार को निकले हैं लोग, जुलूस कहाँ जा रहा है?, रामदरश मिश्र की प्रतिनिधि कविताएँ, आग कुछ नहीं बोलती, शब्द सेतु, बारिश में भीगते बच्चे, हँसी ओठ पर आँखें नम हैं (ग़ज़ल), ऐसे में जब कभी, आम के पत्ते, तू ही बता ऐ ज़िन्दगी, हवाएँ साथ हैं, कभी-कभी इन दिनों, धूप के टुकड़े, आग की हँसी। इनके उपन्यास हैं - पानी के प्राचीर, जल टूटता हुआ, सूखता हुआ तालाब, अपने लोग, रात का सफर, आकाश की छत, आदिम राग, बिना दरवाजे का मकान, दूसरा घर, थकी हुई सुबह, बीस बरस, परिवार, बचपन भास्कर का। इनके कहानी संग्रह हैं - खाली घर, एक वह, दिनचर्या, सर्पदंश, बसन्त का एक दिन, इकसठ कहानियाँ, मेरी प्रिय कहानियाँ, अपने लिए, चर्चित कहानियाँ, श्रेष्ठ आंचलिक कहानियाँ, आज का दिन भी, एक कहानी लगातार, फिर कब आएँगे?, अकेला मकान, विदूषक, दिन के साथ, मेरी कथा-यात्रा। इनके ललित निबन्ध हैं - कितने बजे हैं, बबूल और कैक्टस, घर परिवेश, छोटे-छोटे सुख। इनकी आत्मकथाएँ हैं - सहचर है समय, फुरसत के दिन। इनका यात्रावृत्त है - घर से घर तक देश यात्रा। इनकी डायरी हैं - आते-जाते दिन, आस-पास, बाहर-भीतर। 11 पुस्तकों पर समीक्षा लिखी है और 14 खंडों में इनकी रचनावली प्रकाशित हो चुकी है।

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