CHANDAN KA PHOOL

Original Book/Language: पारमिता लम्बे समय से कथा साहित्य जगत में अपनी ख्याति स्थापित कर चुकी हैं। उनकी कहानियों का दायरा ग्रामीण परिवेश से लेकर, शहर और देश-देशान्तर तक फैला है। इनकी कहानियों में जीवन-जगत की अनकही एवं अमिट अनुभूतियाँ चिर-परिचित परिणति पर न पहुँचकर पाठक को अवाक् कर देती हैं। इसी नाते पारमिता की कहानियाँ पुरानी पीढ़ी की कहानियों से भिन्न एवं अलग मुकाम हासिल करती हैं। शब्द और भाषा में पारमिता कॉस्मोपॉलिटन हैं। देशी-विदेशी, ग्राम्य-अभिजात, अनेक वर्गों के शब्दों को एक सूत्रा में बाँधे रखती हैं। इनकी कहानियों में मौजूद कल्पना और यथार्थ की जादूगरी पाठक को आगोश में भरने की अद्भुत क्षमता रखती है। कहानी चयन में विशेषता, अभिव्यक्ति का पैनापन, गठन की कला, पात्रानुकूल भाषा, बिजली से कौंधते बिम्ब और सटीक प्रतीक योजना में सगुंफित ये कहानियाँ कालोत्तीर्ण होने की स्पर्धा रखती हैं। पारमिता की कहानियाँ विभिन्न प्रतिष्ठित पत्रा-पत्रिकाओं में प्रकाशित होकर बहुचर्चित हैं। उनके अनुवादों को भी हिन्दी के प्रतिष्ठित प्रकाशकों ने महत्त्व दिया है।

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-864-2

Author:PARAMITA SATPATHY

Translation:यह कहानी-संग्रह देवदत्त यदुमणि नायक द्वारा ओड़िया भाषा से हिन्दी भाषा में अनूदित किया गया है। अनुवादक परिचय देवदत्त यदुमणि नायक (शब्दांत) ओड़िया साहित्य की नवीन पीढ़ी के एक कवि हैं। उनका एक कविता संग्रह ‘धरा देउ न थिबा शब्दंक धारणा’ नाम से प्रकाशित है।

Pages:148

MRP:Rs.250/-

Stock:In Stock

Rs.250/-

Details

पारमिता लम्बे समय से कथा साहित्य जगत में अपनी ख्याति स्थापित कर चुकी हैं। उनकी कहानियों का दायरा ग्रामीण परिवेश से लेकर, शहर और देश-देशान्तर तक फैला है। इनकी कहानियों में जीवन-जगत की अनकही एवं अमिट अनुभूतियाँ चिर-परिचित परिणति पर न पहुँचकर पाठक को अवाक् कर देती हैं। इसी नाते पारमिता की कहानियाँ पुरानी पीढ़ी की कहानियों से भिन्न एवं अलग मुकाम हासिल करती हैं। शब्द और भाषा में पारमिता कॉस्मोपॉलिटन हैं। देशी-विदेशी, ग्राम्य-अभिजात, अनेक वर्गों के शब्दों को एक सूत्रा में बाँधे रखती हैं। इनकी कहानियों में मौजूद कल्पना और यथार्थ की जादूगरी पाठक को आगोश में भरने की अद्भुत क्षमता रखती है। कहानी चयन में विशेषता, अभिव्यक्ति का पैनापन, गठन की कला, पात्रानुकूल भाषा, बिजली से कौंधते बिम्ब और सटीक प्रतीक योजना में सगुंफित ये कहानियाँ कालोत्तीर्ण होने की स्पर्धा रखती हैं। पारमिता की कहानियाँ विभिन्न प्रतिष्ठित पत्रा-पत्रिकाओं में प्रकाशित होकर बहुचर्चित हैं। उनके अनुवादों को भी हिन्दी के प्रतिष्ठित प्रकाशकों ने महत्त्व दिया है।

Additional Information

यह कहानी-संग्रह देवदत्त यदुमणि नायक द्वारा ओड़िया भाषा से हिन्दी भाषा में अनूदित किया गया है। अनुवादक परिचय देवदत्त यदुमणि नायक (शब्दांत) ओड़िया साहित्य की नवीन पीढ़ी के एक कवि हैं। उनका एक कविता संग्रह ‘धरा देउ न थिबा शब्दंक धारणा’ नाम से प्रकाशित है।

About the writer

PARAMITA SATPATHY

PARAMITA SATPATHY लेखन: पिछले पच्चीस वर्षों से लेखन कार्यों में रत हैं। अब तक छः कहानी संग्रह एवं एक उपन्यास ओड़िया भाषा में प्रकाशित। एक काव्य संग्रह ओड़िया भाषा में प्रकाशनाधीन। अनुवाद: अंग्रेजी में अनूदित कहानी संग्रह इंटीमेट प्रिटेंस (2010) रूपा एंड कं., नयी दिल्ली से प्रकाशित। हिन्दी में अनूदित कहानी संग्रह ‘दूर के पहाड़’ (2007) भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित। बांग्ला में अनूदित कहानी संग्रह ‘प्राप्ति व अन्यान्य गल्प’ (2014) प्रकाशित। अनेक कहानियाँ हिन्दी, अंग्रेजी, तेलुगु, बांग्ला और गुजराती में अनूदित एवं इंडियन लिटरेचर, म्यूज इंडिया, समकालीन भारतीय साहित्य, शब्दयोग, नया ज्ञानोदय, हंस, वागर्थ, जनसत्ता, अक्षरा, विपुला (तेलुगु), द लिटल मैगजीन और भाषा, बन्धन (बांग्ला) आदि पत्रा-पत्रिकाओं में प्रकाशित। पुरस्कार: ओडिशा राज्य साहित्य अकादमी, भारतीय भाषा परिषद (कोलकाता), गंगाधर रथ फाउंडेशन (ओडिशा), भुवनेश्वर पुस्तक मेला आदि पुरस्कारों से सम्मानित। सेवा: अगस्त 1989 से भारतीय राजस्व सेवा से सम्बद्ध। वर्तमान आयकर विभाग में आयुक्त के पद पर कार्यरत।

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