AUR SIRF TITLI

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-869-7

Author:PRADEEP SAURABH

Pages:174

MRP:Rs.250/-

Stock:In Stock

Rs.250/-

Details

प्रदीप सौरभ का नया उपन्यास ‘और सिर्फ तितली’, पब्लिक स्कूली शिक्षा की भीतरी परतों को एक-एक कर खोलते हुए पब्लिक स्कूली शिक्षा जगत के अन्दर की खुशबू और सड़ाँध को कुछ इस तरह पेश करता है कि आप पहली बार इस अनजाने, अनकहे जगत के समक्ष खडे़ हो जाते हैं और अपने आप से पूछने लगते हैं कि आखिर वे क्या कारण हैं जिनके चलते हमारी स्कूली शिक्षा और शिक्षण पद्धति अपनी सारी चमक-दमक और दावों के, इस कदर खोखली और संस्कार विहीन हो चली है? छोटे-छोटे बच्चों की मासूमियत, उनकी जिज्ञासाएँ, उनकी ज्ञान-पिपासा, उनका सोच-विचार, उनकी रचनात्मकता, उनका साहस, उनकी प्रयोग-प्रियता किस तरह से कुंठित होती जाती है? किस तरह से सुयोग्य, अच्छे और गुणी अध्यापक और अध्यापिकाएँ अपने संस्थान के प्रबन्धन की दोहन एवं शोषणनीति के चलते उत्साह विहीन होते जाते हैं। किस तरह से उनका शोषण किया जाता है। किस तरह वे आपसी मनमुटाव, टुच्ची, गुटबाजी भरी राजनीति के चलते अपने सपनों को चकनाचूर होते देख मनोरोगों तक के शिकार होते रहते हैं? और किस तरह शिक्षा के इस महँगे तिलिस्म का कोई तोड़ नहीं है? और अगर कोई उसे तोड़ने की कोशिश करता है तो उसका क्या हश्र होता है, इन्हीं तमाम पहलुओं पर यह उपन्यास दिलचस्प शैली में रौशनी डालता है। उपन्यास की खासियत यह है कि आप उसे एक ही सिटिंग में पढ़ते चले जा सकते हैं। यही प्रदीप सौरभ की कथा-कलम की विशेषता है।

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PRADEEP SAURABH

PRADEEP SAURABH निजी जीवन में खरी-खोटी हर खूबियों से लैस। मौन में तर्कों का पहाड़ लिये कब, कहाँ और कितना जिया, इसका हिसाब-किताब कभी नहीं रखा। बँधी-बँधाई लीक पर कभी नहीं चले। कानपुर में जन्मे लेकिन लम्बा समय इलाहाबाद में गुजारा। वहीं विश्वविद्यालय से एमए किया। जन-आन्दोलनों में हिस्सा लिया। कई बार जेल गये। कई नौकरियाँ करते-छोड़ते दिल्ली पहुँच कर साप्ताहिक हिन्दुस्तान के सम्पादकीय विभाग से जुड़े। कलम से तनिक भी ऊबे तो कैमरे की आँख से बहुत कुछ देखा। कई बडे़ शहरों में फोटो प्रदर्शनी लगाई। मूड आया तो चित्रांकन भी किया। पत्रकारिता में पच्चीस वर्षों से अधिक समय पूर्वोत्तर सहित देश के कई राज्यों में गुजारा। गुजरात दंगों की रिपोर्टिंग के लिए पुरस्कृत हुए। देश का पहला बच्चों का हिन्दी का अखबार निकाला। पंजाब के आतंकवाद और बिहार के बँधुआ मजदूरों पर बनी फिल्मों के लिए शोध। ‘बसेरा’ टीवी धारावाहिक के मीडिया सलाहकार रहे। दक्षिण से लेकर उत्तनर तक के कई विश्वविद्यालयों में उपन्यासों पर शोध। इनके हिस्से ‘मुन्नी मोबाइल’, ‘तीसरी ताली’ और देश ‘भीतर देश’ उपन्यासों के अलावा कविता, बच्चों की कहानी और सम्पादित आलोचना की पाँच पुस्तकें हैं। उपन्यास ‘तीसरी ताली’ के लिए अन्तरराष्ट्रीय इन्दु शर्मा कथा सम्मान से ब्रिटिश संसद में सम्मानित।

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