TULSIDAS KA KATHA-SHILP

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-762-1

Author:RANGEYA RAGHAVA

Pages:282

MRP:Rs.595/-

Stock:In Stock

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RANGEYA RAGHAVA

RANGEYA RAGHAVA रांगेय राघव 17 जनवरी, 1923 को जन्म आगरा में। मूल नाम टी. एन. वी. आचार्य (तिरुमल्लै नम्बाकम् वीर राघव आचार्य)। कुल से दाक्षिणात्य लेकिन ढाई शतक से पूर्वज वैर (भरतपुर) के निवासी और वैर, बारोली गाँवों के जागीरदार। शिक्षा आगरा में। सेंट जॉन्स कॉलेज से 1944 में स्नातकोत्तर और 1948 में आगरा विश्वविद्यालय से गुरु गोरखनाथ पर पीएच. डी.। हिन्दी, अंग्रेजी, बृज और संस्कृत पर असाधारण अधिकार। 13 वर्ष की आयु में लेखनारम्भ। 23-24 वर्ष की आयु में ही अभूतपूर्व चर्चा के विषय। 1942 में अकालग्रस्त बंगाल की यात्रा के बाद लिखे रिपोर्ताज µ ‘तूफानों के बीच’ µ से चर्चित। साहित्य के अतिरिक्त चित्राकला, संगीत और पुरातत्त्व में विशेष रुचि। साहित्य की प्रायः सभी विधाओं में सिद्धहस्त। मात्रा 39 वर्ष की आयु में कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, रिपोर्ताज के अतिरिक्त आलोचना, सभ्यता और संस्कृति पर शोध व व्याख्या के क्षेत्रों को 150 से भी अधिक पुस्तकों से समृद्ध किया। अपनी अद्भुत प्रतिभा, असाधारण ज्ञान और लेखन-क्षमता के लिए सर्वमान्य अद्वितीय लेखक। संस्कृत रचनाओं का हिन्दी, अंग्रेजी में अनुवाद। विदेशी साहित्य का हिन्दी में अनुवाद। 7 मई, 1956 को सुलोचनाजी से विवाह। 8 फरवरी, 1960 को पुत्राी सीमन्तिनी का जन्म। अधिकांश जीवन आगरा, वैर और जयपुर में व्यतीत। आजीवन स्वतन्त्रा लेखन। हिन्दुस्तानी अकादमी पुरस्कार (1951), डालमिया पुरस्कार (1954), उत्तर प्रदेश सरकार पुरस्कार (1957 व 1959), राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार (1961) तथा मरणोपरान्त (1966) महात्मा गांधी पुरस्कार से सम्मानित। विभिन्न कृतियाँ अन्य भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनूदित और प्रशंसित। लम्बी बीमारी के बाद 12 सितम्बर, 1962 को बम्बई में देहान्त।

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