...AUR ANT MEIN PRARTHANA

Format:Hard Bound

ISBN:81-8143-600-8

Author:UDAY PRAKASH

Pages:202

MRP:Rs.200/-

Stock:In Stock

Rs.200/-

Details

‘कहानी विधा की दृष्टि से उदय प्रकाश ने कहानी के नये प्रतिमान रचे हैं। वे अपनी कहानियों में कहानीपन के निश्चित चौखटे तोड़ते हैं और फिर एक कुशल किस्सागो की तरह बारीक पच्चीकारी से इतिहास-कल्पना, मिथक-यथार्थ, स्मृति-संवेदना को इस तरह परस्पर गूँथते है कि सब मिलकर एक ऐसे घनीभूत अनुभव की सृष्टि करता है, जहाँ कथा-तत्व और सामाजिक-चिन्तन दोनों समृद्ध होते हैं। उनकी कहानियाँ साहित्यिक जगत में जितनी प्रासंगिक हैं, समाजशास्त्रीय अध्ययन की दृष्टि से भी वे एक प्रबुद्ध, सचेत रचनाकार की कलम से निकली अपने समय का प्रामाणिक दस्तावेज़ हैं। कहानी बुनते हुए वे स्थितियों, पात्रों, भाषा का पूर्ण स्वतन्त्रता से प्रयोग करते हैं। उनमें मुक्तिबोध जैसी बेचैनी और परसाई जैसी तटस्थता है।’ -रेखा सेठी (जनसत्ता ‘ 4 दिसम्बर, 2005

Additional Information

‘ये कहानियाँ किस्सागोई की उस मज़बूत रबिश पर चलती हैं, जहाँ एक कहानी कई कहानियों से मिलकर बनती है और किस्सागो इतिहासकार, कलंदर, दार्शनिक, प्रवचनकार, नासेह, संवाददाता, कवि, गद्यकार और फ़क़ीर सभी के भेष बनाकर आता-जाता रहता है। यह स्वर और अन्दाज़, जहाँ तक मेरी जानकारी है, समकालीन हिन्दी कहानी में किसी और से सध नहीं पाया है। इसमें निहित नाटक को काबू में रख पाना और उसके काव्य को सुरक्षित रखना उदय के ही बस में है। उदय दरअसल ऐसे एथलीट हैं, जो अपने कथानाक की लय और चाल को बनाये रखने के लिए बहुत कुछ कुरबान भी कर देते हैं। ...उदय ‘सबआल्टर्न’ (ग़रीब और अकसर दलित जन) को नायक की तरह पेष करने की समस्या से, और मध्यवर्गीय ‘संस्कृति’ से उसके बुनियादी विरोध को पूरी रचनात्मक ताक़त के साथ प्रस्तुत करने वाले अपनी पीढ़ी के अग्रणी कथाकार हैं।’ -असद जै़दी

About the writer

UDAY PRAKASH

UDAY PRAKASH उदय प्रकाश 1952, मध्य प्रदेश के शहडोल (अब अनूपपुर) ज़िले के गाँव सीतापुर में जन्म। सागर वि.वि. सागर और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली से शिक्षा प्राप्त। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और इसके मणिपुर केन्द्र में लगभग चार वर्ष तक अध्यापन। संस्कृति विभाग, मध्य प्रदेश, भोपाल में लगभग दो वर्ष विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी। इसी दौरान ‘पूर्वग्रह’ का सहायक सम्पादन। नौ वर्षों तक टाइम्स ऑफ़ इण्डिया के समाचार पाक्षिक ‘दिनमान’ के सम्पादकीय विभाग में नौकरी। बीच में एक वर्ष टाइम्स रिसर्च फ़ाउंडेशन के स्कूल ऑफ़ सोशल जर्नलिज्म में अध्यापन। लगभग दो वर्ष पी.टी.आई. (टेलीविज़न) और एक वर्ष इंडिपेंडेंट टेलीविज़न में विचार और पटकथा प्रमुख। कुछ समय ‘संडे मेल’ में वरिष्ठ सहायक सम्पादक रहे। इन दिनों स्वतन्त्र लेखन तथा फ़िल्म और मीडिया के लिए लेखन। ‘सुनो कारीगर’, ‘अबूतर-कबूतर’, ‘रात में हारमोनियम, ‘एक भाषा हुआ करती है’, ‘नयी सदी के लिए चयन: पचास कविताएँ’ (कविता संग्रह); ‘दरियाई घोड़ा’, ‘तिरिछ’, ‘और अन्त में प्रार्थना’, ‘पॉल गोमरा का स्कूटर’, ‘पीली छतरी वाली लड़की’, ‘दत्तात्रोय के दुख’, ‘मोहन दास’, ‘अरेबा परेबा’, ‘मैंगोसिल’ (कहानी संग्रह); ‘ईश्वर की आँख’, ‘अपनी उनकी बात’ और ‘नयी सदी का पंचतन्त्र’ (निबन्ध, आलोचना) पुस्तकें प्रकाशित। इसके अलावा लगभग 8 पुस्तकें अंग्रेज़ी में प्रकाशित। ‘पीली छतरी वाली लड़की’ (उर्दू), ‘तिरिछ अणि इतर कथा’, ‘अरेबा परेबा’ (मराठी), ‘मोहन दास’ कन्नड़ में प्रकाशित, पंजाबी, उड़िया, अंग्रेज़ी में प्रकाश्य। ‘लाल घास पर नीले घोड़े’ (मिखाइल शात्रोव के नाटक का अनुवाद और रूपान्तर), ‘कला अनुभव’ (प्रो. हरियन्ना की सौन्दर्यशास्त्रीय पुस्तक का अनुवाद), ‘इन्दिरा गाँधी की आखिरी लड़ाई’ (बी.बी.सी. संवाददाता मार्क टली-सतीश जैकब की किताब का हिन्दी अनुवाद), ‘रोम्यां रोलां का भारत’ (आंशिक अनुवाद और सम्पादन) का अनुवाद। भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार, ओमप्रकाश साहित्य सम्मान, श्रीकान्त वर्मा स्मृति पुरस्कार, मुक्तिबोध पुरस्कार, साहित्यकार सम्मान, हिन्दी अकादेमी, दिल्ली, रामकृष्ण जयदयाल सद्भावना सम्मान, पहल सम्मान, कथाक्रम सम्मान, पुश्किन सम्मान, द्विजदेव सम्मान, साहित्य अकादेमी पुरस्कारों से पुरस्कृत।

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