UMRAQAID

Original Book/Language: बांग्ला भाषा से हिन्दी भाषा में अनूदित. अनुवादक – सुशील गुप्ता

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-683-2

Author:MAHASHWETA DEVI

Translation:महाश्वेता देवी की ख्याति प्रमुख रूप से उनके उन उपन्यासों के कारण है जिनमें उन्होंने आदिवासी जीवन और आदिवासियों के संघर्षों का अप्रतिम चित्रण किया है या फिर 'हज़ार चौरासीवीं की माँ' जैसे उन उपन्यासों की वजह से भी जो नक्सलबाड़ी के महान विप्लव की उपज हैं। लेकिन महाश्वेता देवी ने कई बार भारतीय जीवन के अन्यान्य पहलुओं पर नज़र डाली है और अपनी सुपरिचित शैली में – जो दलित-शोषित जनों के पक्ष को उजागर करती है - इन अभागों की व्यथा-कथा बयान की है। ‘उम्रकैद' ऐसे ही तीन लघु उपन्यासों की श्रृंखला है, जिसमें महाश्वेता देवी ने ऐसे लोगों को जेल के अन्धकार से बाहर लाकर हमारे-आपके सामने पेश किया है जिन्हें 'लाइफ़र' कहते हैं - उम्रकैद पाये हुए क़ैदी जो कई बार चाल-चलन ठीक होने पर भी चौदह साल बाद रिहा नहीं हो पाते। कई कैदी रिहा होने पर बार-बार लौटते रहते हैं। कौन हैं ये लोग? क्या हैं इनकी प्रेरणाएँ या दुष्प्रेरणाएँ? सतीश हो या अबीर या अन्ना – इनके दुख बिलकुल अलग-अलग हैं। महाश्वेता देवी ने उनकी कहानियाँ बयान करते समय अपनी सहानुभूति से भी काम लिया है और समझदारी से भी। तभी वे यह कह सकी हैं कि आज के समाज के नियन्ता ही असली हत्यारे हैं। ‘उम्रकैद' – एक सूत्र में बँधे तीन ऐसे महत्त्वपूर्ण लघु उपन्यास हैं जो पाठक को अविचलित नहीं रहने देंगे।

Pages:236

MRP:Rs.325/-

Stock:In Stock

Rs.325/-

Details

बांग्ला भाषा से हिन्दी भाषा में अनूदित. अनुवादक – सुशील गुप्ता

Additional Information

महाश्वेता देवी की ख्याति प्रमुख रूप से उनके उन उपन्यासों के कारण है जिनमें उन्होंने आदिवासी जीवन और आदिवासियों के संघर्षों का अप्रतिम चित्रण किया है या फिर 'हज़ार चौरासीवीं की माँ' जैसे उन उपन्यासों की वजह से भी जो नक्सलबाड़ी के महान विप्लव की उपज हैं। लेकिन महाश्वेता देवी ने कई बार भारतीय जीवन के अन्यान्य पहलुओं पर नज़र डाली है और अपनी सुपरिचित शैली में – जो दलित-शोषित जनों के पक्ष को उजागर करती है - इन अभागों की व्यथा-कथा बयान की है। ‘उम्रकैद' ऐसे ही तीन लघु उपन्यासों की श्रृंखला है, जिसमें महाश्वेता देवी ने ऐसे लोगों को जेल के अन्धकार से बाहर लाकर हमारे-आपके सामने पेश किया है जिन्हें 'लाइफ़र' कहते हैं - उम्रकैद पाये हुए क़ैदी जो कई बार चाल-चलन ठीक होने पर भी चौदह साल बाद रिहा नहीं हो पाते। कई कैदी रिहा होने पर बार-बार लौटते रहते हैं। कौन हैं ये लोग? क्या हैं इनकी प्रेरणाएँ या दुष्प्रेरणाएँ? सतीश हो या अबीर या अन्ना – इनके दुख बिलकुल अलग-अलग हैं। महाश्वेता देवी ने उनकी कहानियाँ बयान करते समय अपनी सहानुभूति से भी काम लिया है और समझदारी से भी। तभी वे यह कह सकी हैं कि आज के समाज के नियन्ता ही असली हत्यारे हैं। ‘उम्रकैद' – एक सूत्र में बँधे तीन ऐसे महत्त्वपूर्ण लघु उपन्यास हैं जो पाठक को अविचलित नहीं रहने देंगे।

About the writer

MAHASHWETA DEVI

MAHASHWETA DEVI बांग्ला की प्रख्यात लेखिका महाश्वेता देवी का जन्म 1926 में ढाका में हुआ। वह वर्षों बिहार और बंगाल के घने कबाइली इलाकों में रही हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में इन क्षेत्रों के अनुभव को अत्यन्त प्रामाणिकता के साथ उभारा है।महाश्वेता देवी एक थीम से दूसरी थीम के बीच भटकती नहीं हैं। उनका विशिष्ट क्षेत्र है-दलितों और साधन-हीनों के हृदयहीन शोषण का चित्रण और इसी संदेश को वे बार-बार सही जगह पहुँचाना चाहती हैं ताकि अनन्त काल से गरीबी-रेखा से नीचे साँस लेनेवाली विराट मानवता के बारे में लोगों को सचेत कर सकें। गैर-व्यावसायिक पत्रों में छपने के बावजूद उनके पाठकों की संख्या बहुत बड़ी है। उन्हें साहित्य अकादेमी, ज्ञानपीठ पुरस्कार व मैग्सेसे पुरस्कार समेत अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।

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