KITNE KATHGHARE

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-960-1

Author:RAJNI GUPT

Pages:216


MRP : Rs. 475/-

Stock:In Stock

Rs. 475/-

Details

कितने कठघरे

Additional Information

गहरी संवेदना में ऊभचूभ करता रजनी गुप्त का यह नया उपन्यास पाठकों को अस्थिर कर देता है। एक समय था जब चीजें स्याह और उजले परिप्रेक्ष्य में बेहिचक देखी जा सकती थी परन्तु अब नहीं। पाठक रत्ना से अलग होकर भी असंपृक्ते हो उठता है। कमाल है न। जैसा उपन्यासकार चाहता है, पाठक का चाहना भी वही हो उठता है। जेल के भीतर स्त्रियों की ज़िन्दगियाँ क्या हैं और क्यों हैं, ये दो अहम सवाल मुख्य धारा से टकराते हैं। इनके प्रति देखने का नज़रिया बदलने की उपन्यास में जो मशक्कहत की गयी है, वह कथाकार को एक एक्टिविस्ट की भूमिका में लाकर खड़ा कर देता है। वांछा की उपस्थिति बड़ी सकारात्मक ऊर्जा देती है। उपन्यास में तेजी से घटती हुई घटनाएँ और बदलते दृश्य भी अपने में इतना पैनापन लिए हुए हैं कि उनकी धार पाठक के मस्तिष्क में अपनी स्मृति सुरक्षित कर लेती है। कथा के केन्द्र में रत्ना है, अविकसित मस्तिष्क वाले पति के पल्ले से बँधी। रत्ना जिस तरह की राह चनती है, दरअसल वह ऐसी मृगमरीचिका है जहाँ हजारों रत्ना जैसी स्त्रियों। को भरे पात्र होने का अहसास देकर छला जाता है। ''कितने कठघरे' रजनी गुप्त का उपन्यास तथाकथित अपराध को झेलती स्त्रियों के लिए लोकतन्त्र के भीतर के सत्य अलोगार्की (अत्पतन्त्र । पर उँगली रखता है। एक और उल्लेखनीय बात, इस उपन्यास में भारतीय जेलों में रहती बन्दिनियों। की बदहाल दशा पर समाजशास्त्रीय नजरिये से भी विश्लेषण किया गया है। हिन्दी जगत में इस नयी थीम पर आधृत यह उपन्यास विशाल पाठक वर्ग। की अन्तस्थली तक पहुंचकर उनकी सोच व संवेदना संसार में नए सिरे से हलचल मचायेगा, ऐसा विश्वास है। -शशिकला राय

About the writer

RAJNI GUPT

RAJNI GUPT रजनी गुप्त का जन्म 2 अप्रैल, 1963, चिरगाँव, झाँसी (उ.प्र.) में हुआ। जे.एन.यू., नयी दिल्ली से उन्होंने एम.फिल., पीएच. डी. की शिक्षा प्राप्त की। इनकी प्रकाशित कृतियाँ हैं - कहीं कुछ और, किशोरी का आसमाँ, एक न एक दिन, कुल जमा बीस (उपन्यास); एक नयी सुबह, हाट बाजार, दो कहानी संग्रह शीघ्र प्रकाश्य (कहानी संग्रह); आजाद औरत कितनी आजाद, मुस्कराती औरतें, आखिर क्यों व कैसे लिखती हैं स्त्रियाँ (सम्पादन); सुनो तो सही (स्त्री विमर्श)। रजनी गुप्त ‘कहीं कुछ और’ उपन्यास राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन ओपन यूनिवर्सिटी (उ.प्र.) के स्त्री विमर्श के पाठ्यक्रम एवं ‘सुनो तो सही’ हिन्दी साहित्य के इतिहास में शामिल रही हैं। पिछले 13 सालों से ‘कथाक्रम’ साहित्यिक पत्रिका में सम्पादकीय सहयोग दिया है। रजनी गुप्त को ‘एक नयी सुबह’ पर उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का सर्जना पुरस्कार एवं युवा लेखन पुरस्कार, किताब घर प्रकाशन द्वारा आर्यस्मृति साहित्य सम्मान 2006, ‘किशोरी का आसमां’ उपन्यास पर उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा अमृतलाल नागर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। रजनी गुप्त राष्ट्रीयकृत बैंक में प्रबन्धक के पद पर हैं।

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