JAAG CHET KUCHH KAROU UPAI

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-923-6

Author:MITHILESHWAR

Pages:278

MRP:Rs.495/-

Stock:In Stock

Rs.495/-

Details

आत्मकथात्मक उपन्यास

Additional Information

मिथिलेश्वर के आत्मकथात्म्क उपन्यासों की शृंखला का यह तीसरा और अंतिम उपन्यास है। लेकिन अब तक की उनकी कृतियों में बेजोड़, बेमिसाल और यादगार कृति है। लेखक की प्रौढ़ लेखनी से सृजित यह कृति अपनी विशेषताओं और विलक्षणताओं की वजह से हिन्दी जगत के लिए न सिर्फ उल्लेखनीय है,बल्कि अपने प्रभाव में बेहद असरदार तथा श्रेष्ठ साहित्य के निकष पर भी कालजयी कृति है।

About the writer

MITHILESHWAR

MITHILESHWAR जन्म: 31 दिसम्बर 1950, बिहार के भोजपुर जिला के बैसाडीह गाँव में। शिक्षा: एम.ए., पी-एच.डी. (हिन्दी)। प्रकाशन: बाबूजी (1976), बन्द रास्तों के बीच (1978), दूसरा महाभारत (1979), मेघना का निर्णय (1980), मिथिलेश्वर की श्रेष्ठ कहानियाँ (1980), गाँव के लोग (1981), तिरिया जनम (1982), विग्रह बाबू (1982), हरिहर काका (1983), जिन्दगी का एक दिन (1983), छह महिलाएँ (1984), माटी की महक, धरती गाँव की (1986), एक में अनेक (1987), प्रतिनिधि कहानियाँ (1989), एक थे प्रो. बी. लाल (1993), भोर होने से पहले (1994), चर्चित कहानियाँ (1994) कहानी-संग्रह; झुनिया (1980), युद्धस्थल (1981), प्रेम न बाड़ी ऊपजै (1995) उपन्यास; सृजन की जमीन निबन्ध-संग्रह; उस रात की बात (1993), एक था पंकज (यंत्रस्थ), बालोपयोगी पुस्तकें। सम्मान: बाबूजी के लिए म.प्र. साहित्य परिषद् का अखिल भारतीय मुक्तिबोध पुरस्कार, बन्द रास्तों के बीच के लिए सोवियत लैण्ड नेहरू पुरस्कार, मेघना का निर्णय के लिए उ.प्र. हिन्दी संस्थान का यशपाल पुरस्कार, निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन का अमृत पुरस्कार तथा नागरी प्रचारिणी सभा का साहित्य मार्तण्ड सम्मान। सम्प्रति: प्राध्यापक, हिन्दी विभाग, एच.डी. जैन कॉलेज, आरा (बिहार)। सम्पर्क: महाराज हाता, आरा-802301 (बिहार)

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