BRAHMPUTRA KE TAT PAR

Original Book/Language: बांग्ला भाषा से हिन्दी भाषा में अनूदित।

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-816-1

Author:TASLIMA NASRIN

Translation:"यह पुस्तक ब्रह्मपुत्र के तट पर रहने वाली दो स्त्रियों का जीवन-जीवन में उनके खाने-पीने की व्यथा-कथा है। स्त्रियाँ जो नदी की तरह ही बहती हुई चली जाती है, दूर- देशांतर अजनबी शहरों,नगरों में। एक छोटे से परिवार के घेरे में बंदी सुख-दुख झेलती और निरंतर अपने छोड़ आए शहर,नदी-तट,घर की स्मृतियों में डूबतीं-उतरती। कुछ हद तक इस आत्मकथात्मक उपन्यास में अपनी धरती से उखाड़ जाने की पीड़ा एक अमूर्त्त रूप से हर कहीं उपस्थित रहती है। "

Pages:112

MRP:Rs.275/-

Stock:In Stock

Rs.275/-

Details

बांग्ला भाषा से हिन्दी भाषा में अनूदित।

Additional Information

"यह पुस्तक ब्रह्मपुत्र के तट पर रहने वाली दो स्त्रियों का जीवन-जीवन में उनके खाने-पीने की व्यथा-कथा है। स्त्रियाँ जो नदी की तरह ही बहती हुई चली जाती है, दूर- देशांतर अजनबी शहरों,नगरों में। एक छोटे से परिवार के घेरे में बंदी सुख-दुख झेलती और निरंतर अपने छोड़ आए शहर,नदी-तट,घर की स्मृतियों में डूबतीं-उतरती। कुछ हद तक इस आत्मकथात्मक उपन्यास में अपनी धरती से उखाड़ जाने की पीड़ा एक अमूर्त्त रूप से हर कहीं उपस्थित रहती है। "

About the writer

TASLIMA NASRIN

TASLIMA NASRIN तसलीमा नसरीन ने अनगिनत पुरस्कार और सम्मान अर्जित किए हैं, जिनमें शामिल हैं - मुक्त चिन्तन के लिए यूरोपीय संसद द्वारा प्रदत्त - सखारव पुरस्कार; सहिष्णुता और शान्ति प्रचार के लिए यूनेस्को पुरस्कार; फ्रांस सरकार द्वारा मानवाधिकार पुरस्कार; धाखमक आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष के लिए फ्रांस का ‘एडिट द नान्त पुरस्कार’; स्वीडन लेखक संघ का टूखोलस्की पुरस्कार; जर्मनी की मानववादी संस्था का अर्विन फिशर पुरस्कार; संयुक्त राष्ट्र का फ्रीडम फ़्राम रिलिजन फाउण्डेशन से फ्री थॉट हीरोइन पुरस्कार और बेल्जियम के मेंट विश्वविद्यालय से सम्मानित डॉक्टरेट! वे अमेरिका की ह्युमैनिस्ट अकादमी की ह्युमैनिस्ट लॉरिएट हैं। भारत में दो बार, अपने ‘निर्वाचित कलाम’ और ‘मेरे बचपन के दिन’ के लिए वे ‘आनन्द पुरस्कार’ से सम्मानित। तसलीमा की पुस्तकें अंग्रेजी, फ्रेंच, इतालवी, स्पैनिश, जर्मन समेत दुनिया की तीस भाषाओं में अनूदित हुई हैं। मानववाद, मानवाधिकार, नारी-स्वाधीनता और नास्तिकता जैसे विषयों पर दुनिया के अनगिनत विश्वविद्यालयों के अलावा, इन्होंने विश्वस्तरीय मंचों पर अपने बयान जारी किए हैं। ‘अभिव्यक्ति के अधिकार’ के समर्थन में, वे समूची दुनिया में, एक आन्दोलन का नाम बन चुकी हैं।

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality