PESHI

Original Book/Language: जर्मन भाषा से हिन्दी भाषा में अनूदित लेखिका : हेर्टा म्युलर अनुवादक : अमृत मेहता

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-529-0

Author:Herta Muller

Translation:--- एक संघर्षशील महिला की कहानी ‘पेशी’ --- नोबेल पुरस्कार से सम्मानित जर्मन लेखिका हेर्टा म्युलर द्वारा लिखा गया उपन्यास ‘पेशी’ एक ऐसी महिला की कहानी है, जो एक तानाशाही जीवन में ख़ुशी ढूँढ़नी की कोशिश में अपना जीवन गवाँ रही है। हेर्टा म्युलर की यह कथा बहुत ही मार्मिक और तीख़ी व्यंग्योक्तियों से परिपूर्ण है। हेर्टा म्युलर कहानी में दोहरी संवेदना, दोहरे प्रतीक और दोहरे मुहावरे अभिव्यक्त करती हैं जिससे इनकी शैली विशेष मानी जाती है। वाणी प्रकाशन से प्रकाशित जर्मन लेखिका हेर्टा म्युलर द्वारा लिखा गया और अमृत मेहता द्वारा जर्मन भाषा से हिन्दी भाषा में अनुवादित उपन्यास ‘पेशी’ आप सभी के समक्ष प्रस्तुत है। पेशी | हेर्टा म्युलर | उपन्यास | ISBN : 978-93-5072-529-0 | सजिल्द संस्करण | मूल्य 395 रुपये| पुस्तक फ्लिप्कार्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध है.

Pages:172

MRP:Rs.395/-

Stock:In Stock

Rs.395/-

Details

जर्मन भाषा से हिन्दी भाषा में अनूदित लेखिका : हेर्टा म्युलर अनुवादक : अमृत मेहता

Additional Information

--- एक संघर्षशील महिला की कहानी ‘पेशी’ --- नोबेल पुरस्कार से सम्मानित जर्मन लेखिका हेर्टा म्युलर द्वारा लिखा गया उपन्यास ‘पेशी’ एक ऐसी महिला की कहानी है, जो एक तानाशाही जीवन में ख़ुशी ढूँढ़नी की कोशिश में अपना जीवन गवाँ रही है। हेर्टा म्युलर की यह कथा बहुत ही मार्मिक और तीख़ी व्यंग्योक्तियों से परिपूर्ण है। हेर्टा म्युलर कहानी में दोहरी संवेदना, दोहरे प्रतीक और दोहरे मुहावरे अभिव्यक्त करती हैं जिससे इनकी शैली विशेष मानी जाती है। वाणी प्रकाशन से प्रकाशित जर्मन लेखिका हेर्टा म्युलर द्वारा लिखा गया और अमृत मेहता द्वारा जर्मन भाषा से हिन्दी भाषा में अनुवादित उपन्यास ‘पेशी’ आप सभी के समक्ष प्रस्तुत है। पेशी | हेर्टा म्युलर | उपन्यास | ISBN : 978-93-5072-529-0 | सजिल्द संस्करण | मूल्य 395 रुपये| पुस्तक फ्लिप्कार्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध है.

About the writer

Herta Muller

Herta Muller जन्म 17 अगस्त, 1953 में रोमानिया के नित्सकीडॉर्फ नामक गाँव में हुआ। 1973 से 1976 तक इन्होंने जर्मन और रोमानियाई साहित्य, भाषा और संस्कृति का अध्ययन किया और एक कारखाने में बतौर अनुवादिका नियुक्त हो गयीं। लेकिन जब इन्होंने खुफिया विभाग ‘सिक्योरिताते’ को सहयोग देने से इनकार कर दिया तो इन्हें यह काम छोड़ना पड़ा। तब इन्होंने 1979 से 1983 तक जर्मन शिक्षिका के रूप में काम किया और 1984 से स्वतन्त्र लेखन आरम्भ कर दिया। मार्च 1987 से ये जर्मनी की प्रवासी हैं। इन्हें अनेक साहित्य पुरस्कारों से सम्मानित होने के बाद वर्ष 2009 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

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