SHAHZADA DARASHIKOH : DAHASHAT KA DANSH

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-633-4

Author:SHATRUGHNA PRASAD

Pages:292

MRP:Rs.495/-

Stock:In Stock

Rs.495/-

Details

शहज़ादा दाराशिकोह : दहशत का दंश

Additional Information

'शहज़ादा दाराशिकोह : दहशत का दंश' में 'समुद्रसंगम' तथा 'दाराशिकोह' के बाद के आतंकपूर्ण भारतीय जीवन के यथार्थ का मर्मस्पर्शी चित्रण है। इस उपन्यास का आरम्भ दारा की पराजय के बाद बन्दी दारा का औरंगज़ेब द्वारा अपमान, प्रजा में विद्रोह की आशंका और फिर दारा की शहादत से होता है। इसके बाद निर्भीक सूफ़ी साधक सरमद की भी शहादत हो जाती है। आगरा के कारागार में कैद शाहजहाँ और जहाँनारा की बेबसी को महसूस कर पंडितराज काशी की ओर पलायन करते हैं। पर वहाँ एक ओर पंडित अप्पय दीक्षित विद्वेषवश उन्हें तंग करते हैं तो दूसरी ओर मुगल सैनिक पीछा करते हैं। पंडितराज 'गंगालहरी' लिख कर जल समाधि ले लेते हैं। औरंगजेब की पुत्री जेबुन्निसा और दाराशिकोह की पुत्री आलमनारा की असफल प्रेमकथाओं के मूल में यही दहशत है। उसका हाहाकार मर्मबंधक है। यह उपन्यास युगीन यथार्थ को दिखा देता है कि मजहबी सियासत की कट्टरता दहशत ही फैलाती है। चतुर्दिक हाहाकार ही गूंजता है। मानवता आहत होती है। हम आज भी इस दहशत की अनुभूति से काँप जाते हैं। ऐसा लगता है कि उस दहशत का दर्द पुनः उभर आया है।

About the writer

SHATRUGHNA PRASAD

SHATRUGHNA PRASAD शत्रुघ्न प्रसाद बिहार प्रदेश के छपरा नगर में फ़रवरी 1932 ई. में शत्रुघ्न प्रसाद का जन्म हुआ। पटना विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए. किया। इसी के साथ इतिहास, संस्कृति तथा सामाजिक जीवन एवं राष्ट्रबोध का अध्ययन-मनन किया। सन् 1957 से 1992 तक मगध विश्वविद्यालय के किसान कॉलेज, सोहसराय (नालन्दा) में हिन्दी साहित्य का अध्यापन किया। पास के विश्वप्रसिद्ध नालन्दा विद्यापीठ के खंडहर को देखकर भारतीय जीवन के सृजन तथा विनाश की गहरी अनुभूति की हिन्दी, बँगला, गुजराती तथा मराठी के ऐतिहासिक उपन्यासों के अनुवादों को पढ़कर ऐतिहासिक उपन्यास के लेखन का संकल्प कर लिया। इसी संकल्प का परिणाम हैं, ये सभी रचनाएँ।। सिद्धियों के खंडहर (12वीं सदी), शिप्रा साक्षी है (ईसा पूर्व पहली सदी), हेमचन्द्र विक्रमादित्य व हेमू की आँखें (16वीं सदी), सुनो भाई साधो (15वीं सदी), तुंगभद्रा पर सूर्योदय (14वीं सदी), कश्मीर की बेटी (14वीं सदी), सरस्वती सदानीरा (ईसापूर्व याज्ञवल्क्य युग), अरावली का मुक्त शिखर (16वीं सदी), शहज़ादा दारा शिकोह : दहशत का दंश (17वीं सदी) । अनेकानेक पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त। सम्पर्क : बी-3, त्रिभुवन विनायक रेजिडेंसी, बुद्ध कॉलोनी, होस्पीटो इंडिया के दक्षिण, पटना-800 001 मोबाईल : 09431685504

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