MAURYA SAMRAT

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5072-454-5

Author:RAJENDRA MOHAN BHATNAGAR

Pages:358

MRP:Rs.300/-

Stock:In Stock

Rs.300/-

Details

मौर्य सम्राट : चन्द्रगुप्त मौर्य-चाणक्य पर आधारित ऐतिहासिक उपन्यास

Additional Information

मौर्य सम्राट 344 ईसा पूर्व के अतीत का वह वर्तमान है जो आने वाले कल का भी आधार बनता है। भारत का पहला सम्राट महापद्मनन्द शूद्र था। उसे ही दूसरा परशुराम कहा गया। उस वंश का अन्तिम सम्राट धननन्द धन-सम्पदा, साम्राज्य और सैन्य शक्ति की दृष्टि से सर्वोपरि था। सिकन्दर जिस विशाल साम्राज्य की तरफ रुख भी नहीं कर सका उस महान् और बेजोड़ वंश का पतन चाणक्य के माध्यम से चन्द्रगुप्त मौर्य ने किया। पर क्यों? कैसे? क्या नन्दवंश का अन्त दूसरे शूद्र ने किया था या वह शुद्र नहीं था अथवा चाणक्य ने उसे नया जन्म दिया था? पर वास्तव में वह था कौन? सिकन्दर के सेनानायक ने अपनी पुत्री कार्नेलिया का विवाह उससे क्यों किया? क्यों आम्भीक, तक्षशिला नरेश, राज्य से वंचित हुआ और कैसे उसकी बहन अलका वहाँ की सम्राज्ञी हुई? दाण्ड्यायन ने सिकन्दर को आशीर्वाद क्यों नहीं दिया? तब निरंकश शासन के समानान्तर जो व्यवस्था थी, क्या वह गणतन्त्रात्मक थी? थी तो कैसे? पतन और उत्थान के पीछे कौन-सी अन्तःकथाएँ सक्रिय रहती हैं? इतिहास में उनका क्या महत्त्व है? इस उपन्यास में उनकी भूमिका कितनी सार्थक रही? ऐसे अनेक प्रश्नों के उत्तर तलाशती यह गाथा अपने साथ आपको लेकर चलना चाहती है, बशर्ते आप अपने समय का सामना करने के लिए सक्रिय हों।

About the writer

RAJENDRA MOHAN BHATNAGAR

RAJENDRA MOHAN BHATNAGAR जन्म : सन् 1938 अम्बाला (हरियाणा) में। रोहतक के ज़मींदार परिवार से। प्रकाशित वाङ्मय उपन्यास : दिल्ली चलो, गौरांग, दंश, नीले घोड़े का सवार, न गोपी : न राधा, स्वराज्य, कुली बैरिस्टर, राज राजेश्वर, सरदार, अन्तिम सत्याग्रही, रास्ता यह भी है, एक अन्तहीन युद्ध, रिवोल्ट, मोनालिसा, प्रेमदीवानी, युगपुरुष अंबेडकर, महाबानो, अमृत घट, ज़िन्दगी का एहसास, माटी की गन्ध, परिधि, माटी की पुकार, वैलेंटाइन डे, टूटे आकार, नया मसीहा, कायदे आजम, विवेकानन्द, तमसो मा ज्योतिर्गमय, सत्यमेव जयते, सर्वोदय, मंचनायक, अन्दर की आग, मन्ना बेगम, वसुधा, शुभप्रभात, वाग्देवी, जोगिन, अनन्त आकाश, खुदा गवाह है, श्याम प्रिया आदि 65 से अधिक उपन्यास। कहानी : बस्ती दर्द, मोम की उँगलियाँ, चाणक्य की हार, एक टुकड़ा धूप, माँग का सिन्दूर, थामली, गौरैया, अंजाम, सप्त किरण आदि 11 संग्रह। नाटक : माटी कहे कुम्हार से, मीरा, नायिका, सूर्यास्त का चोर, सारथिपुत्र, रक्तध्वज, सेनानी, दुरभिसंधि, शताब्दी पुरुष, ताम्रपत्र, सूर्याणी आदि 15 नाटक। आलोचना : आधुनिक हिन्दी कविता ग्रन्थ विचार, सामयिकी, महाकवि घनानन्द, सूरदास, कबीर, जैनेन्द्र और उनका समग्र साहित्य, जैनेन्द्र और निबन्ध साहित्य आदि बाईस ग्रन्थ। पुरस्कार : राजस्थान अकादमी का सर्वोच्च मीरा पुरस्कार, महाराणा कुम्भा पुरस्कार, विशिष्ट साहित्यकार सम्मान, नाहर सम्मान पुरस्कार, घनश्याम दास सराफ सर्वोत्तम साहित्य पुरस्कार। अनुवाद : अंग्रेज़ी, फ्रेंच, उड़िया, मराठी, कन्नड़, गुजराती आदि भाषाओं में।

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