PARAJAY

Original Book/Language: रशियन भाषा से हिन्दी भाषा में अनूदित.

Format:Paper Back

ISBN:9789352291571

Author:ALEKSANDER FADEYEV

Translation:‘पराजय’ सोवियत रूसी लेखक फ़ेदयेव का पहला उपन्यास है। उपन्यास का घटना-क्रम छापामारों के जीवन की जटिलताओं,आस्थाओं और परेशानियों के इर्द-गिर्द घूमता है। लेखक खुद छापामार की भूमिका जीवन में निभा चुका है जिसके अनुभवों के कारण इस उपन्यास का कथानक न केवल विश्वसनीय बन पड़ा है, बल्कि रूसी क्रांति में अपनी आस्था को भी सच्चे,सटीक ढंग से संप्रेषित करता है। कई मायनों में यह एक उदास किताब है। सच्ची आस्था इतिहास में गलत पक्षधरता के कारण किस कदर आत्म-पराजयी हो सकता है – किताब और लेखक का जीवन इसका उदहारण है।

Pages:314

MRP:Rs.150/-

Stock:In Stock

Rs.150/-

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रशियन भाषा से हिन्दी भाषा में अनूदित.

Additional Information

‘पराजय’ सोवियत रूसी लेखक फ़ेदयेव का पहला उपन्यास है। उपन्यास का घटना-क्रम छापामारों के जीवन की जटिलताओं,आस्थाओं और परेशानियों के इर्द-गिर्द घूमता है। लेखक खुद छापामार की भूमिका जीवन में निभा चुका है जिसके अनुभवों के कारण इस उपन्यास का कथानक न केवल विश्वसनीय बन पड़ा है, बल्कि रूसी क्रांति में अपनी आस्था को भी सच्चे,सटीक ढंग से संप्रेषित करता है। कई मायनों में यह एक उदास किताब है। सच्ची आस्था इतिहास में गलत पक्षधरता के कारण किस कदर आत्म-पराजयी हो सकता है – किताब और लेखक का जीवन इसका उदहारण है।

About the writer

ALEKSANDER FADEYEV

ALEKSANDER FADEYEV अलेक्सांद्र फ़ेदयेव (1901 -1956 ) तत्कालीन सोवियत रूस के उन लेखकों में थे, जिनके रचना-कर्म को उनके सोवियत रुसी होने ने गम्भीर रूप से प्रभावित किया । अपने ज़माने के किसी साधारण रूसी की तरह फ़ेदयेव का भी रूसी क्रांति में गहरा विश्वास था । उन्होनें जापानियों के विरुद्ध छापामार युद्ध में हिस्सा लिया था और रुसी क्रांति के दौरान वह सफ़ेद सेना के लड़ाके रहे थे । वह स्तालिन के घोर समर्थकों में थे और विचित्र संयोग से बोरिस पास्तरनाक के पड़ोसी थे । फ़ेदयेव सोवियत यूनियन लेखक संघ के संस्थापकों में से एक थे, और 1946 - 1954 तक उसके अध्यक्ष भी रहे । अपने जीवन के अन्तिम वर्षो में वह शराबखोरी के अभ्यस्त हो गये थे और 1956 में आत्महत्या से उनकी मृत्यु हुई । उल्लेखनीय व है की दुखद मृत्यु पर लेख पास्तरनाक ने भी लिखा, जो स्वयं स्तालिन के शासन में प्रताड़ित हुए थे ।

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