UNNISAVIN SHATABDI KA HINDI SAHITYA

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-032-1

Author:GOPAL RAI & SATYAKETU SANKRIT

Pages:336

MRP:Rs.495/-

Stock:In Stock

Rs.495/-

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प्रस्तुत पुस्तक में सन 1800 से लेकर 1900 तक के कालखंड पर विचार करनेके तारतम्य में शुक्ल जी द्वरा 1843 ई. से आधुनिक काल की शुरुआत माने जाने वाले तर्क के अनौचित्य पर प्रकाश डालते हुए इसे तनिक पीछे खिसकाकर 1800 ई. को आधुनिक काल का प्रस्थान बिन्दु मानने की स्वीकारोक्ति को पर्याप्त तर्क के साथ प्रस्तुत किया गया है। इसके साथ-साथ इस पुस्तक में और भी कई नये तथ्यों का अन्वेषण कर उसे उजागर करने की कोशिश की गयी है।

About the writer

GOPAL RAI & SATYAKETU SANKRIT

GOPAL RAI & SATYAKETU SANKRIT गोपाल राय जन्म: 13 जुलाई, 1932 को बिहार के बक्सर जिले के एक गाँव, चुन्नी में। मृत्यु: 25 सितम्बर 2015। शिक्षा: आरम्भिक शिक्षा गाँव और निकटस्थ कस्बे के स्कूल में। माध्यमिक शिक्षा बक्सर हाई स्कूल, बक्सर और कॉलेज की शिक्षा पटना कॉलेज, पटना में। स्नातकोत्तर शिक्षा हिन्दी-विभाग पटना विश्वविद्यालय, पटना में। पटना विश्वविद्यालय से ही 1964 में ‘हिन्दी कथा साहित्य और उसके विकास पर पाठकों की रुचि का प्रभाव’ विषय पर डी.लिट. की उपाधि। 21 फरवरी, 1957 को पटना विश्वविद्यालय, पटना में हिन्दी प्राध्यापक के रूप में नियुक्ति और वहीं से 4 दिसम्बर, 1992 को प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के रूप में सेवानिवृत्ति। सत्यकेतु सांकृत जन्म: 13 मार्च, 1964, पटना, बिहार। शिक्षा: प्रारम्भिक और माध्यमिक शिक्षा: सर गणेशदत्त पाटलिपुत्रा उच्च विद्यालय, पटना। स्नातक: पटना विश्वविद्यालय, पटना, बिहार। स्नातकोत्तर: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली, वर्ष 1996 में पीएच.डी.। हिन्दी उपन्यास में विश्वविद्यालयीय परिसर जीवन का अंकन: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन विषय पर। लघु शोध परियोजना वर्ष 2009 में पूर्ण। प्रेमचन्द और जैनेन्द्र की कहानियों का तुलनात्मक अध्ययन पर यू.जी.सी. द्वारा प्रदत्त लघु शोध परियोजना। भाषा, समीक्षा, पुस्तक वार्ता, हिन्दी अनुशीलन, साक्षात्कार, व्यंग्य तरंग, व्यंग्य धारा, समसामयिक सृजन आदि पत्रिकाओं में पुस्तक समीक्षाएँ एवं लेख प्रकाशित। यू.जी.सी. एवं अन्य प्रमुख संस्थाओं द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में विभिन्न विषयों पर शोध-पत्रों का वाचन एवं उनका प्रकाशन।

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