Rammohan Rai ne Kaha

Format:Paper Back

ISBN:978-81-8214-041-7

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Pages:16

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राममोहन राय ने कहा

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भारत एक खोज 19वीं और 20वीं सदी की अवधि भारत में ज्ञानोदय की अवधि मानी जाती है। हज़ारों साल के भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक इतिहास में कुछेक रूढ़ियाँ और कुरीतियाँ भी आ जुड़ी थीं, जिन्हें पुनरुत्थानवादी तत्व परम्परा का नाम देते थे। इसके अतिरिक्त भारत के पास वेद-उपनिषद, न्याय-दर्शन की जो समृद्ध सम्पदा थी वह मठों-मन्दिरों के अँधेरे कोनों में दबी पड़ी थी। धर्मों की कल्पना मानव-मात्र के कल्याण के लिए कभी की गयी थी, वह गलत व्याख्याओं के चलते सामाजिक विघटन की भूमिका अदा कर रहा था-मनुष्य-मनुष्य के बीच नफरत के बीज बो रहा था। पश्चिम से आयत्त नयी रोशनी वाली वैज्ञानिक शिक्षा पद्धति और सोच को अस्पृश्य भाव से देखा जाता था। ऐसे अन्धकारमय वातावरण में आधुनिक भारत के विद्वानों-विचारकों- राजनेताओं ने नये ज्ञान रूपी सूर्य का आह्वान किया और इस तरह हमारे राष्ट्र के जीवन में ज्ञानोदय हुआ। राजा राममोहन राय, विवेकानन्द, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू, डॉ. राधाकृष्णन, गणेश शंकर विद्यार्थी, जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया आदि मिटानों विचारकों-राजनेताओं की गणना भारतीय ज्ञानोदय की उन्हीं विभूतियों में होती है। इस पुस्तकमाला में किशोर एवं बाल पाठकों के लिए ज्ञानोदय के इन महापुरुषों के विचार उन्हीं के शब्दों में प्रस्तुत किये गये हैं। आशा है, किशोर पाठक, जिन पर आगे चलकर देश के विकास का दायित्व आना है, इससे लाभान्वित होंगे और अपना ज्ञानवर्धन करेंगे।

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