PACHAS KAVITAYEN - KUNWAR NARAYAN

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5000-718-1

Author:KUNWAR NARAYAN

Pages:116

MRP:Rs.65/-

Stock:In Stock

Rs.65/-

Details

पचास कविताएँ - कुँवर नारायण

Additional Information

कुँवर नारायण, हिन्दी कविता के ही नहीं, बल्कि समूचे भारतीय साहित्य की बीसवीं शताब्दी के अग्रणी एवं अन्यतम लेखक हैं। जीवन विवेक एवं नैतिक चेतना से सम्पन्न उनकी सजग आत्मीय द्रष्टि ने हिन्दी कविता के वितान में कुछ ऐसा बड़ा यथार्थ रचा है, जिसकी शिनाख़्त आने वाले समयों में बार-बार अपने पुनर्पाठ के लिए प्रेरित करती रहेगी। 'पचास कविताएँ नयी सदी के लिए चयन' श्रृंखला में यह देखना प्रीतिकर और प्रासंगिक है कि अपने जीवन के आठवें दशक में कुँवर नारायण पूर्णतया सृजनरत रहते हुए संवेदनाओं की ऐसी ठोस ज़मीन पर खड़े नज़र आते हैं, जहाँ से उनकी हिस्सेदारी एक ऐसे परिपक्व चिन्तक की बनती है, जिसमें समय और स्थान, जीवन और विचार, राजनीति और समाज तथा संवेदनाएँ और जिजीविषा पूरी मनुष्यता के साथ आज भी सक्रिय हैं। एक शास्त्रीय अनुशासन में यदि कुँवर नारायण की मनुष्यता को प्रतिबिम्बित करने वाली आवाज का लेखा-जोखा बनाया जाये, तो उसमें हमारे समय में व्यक्ति के आत्मसंघर्ष, उसके आत्मबोध और नैतिक ज़िम्मेदारी के सूक्ष्मतम ब्यौरे दर्ज़ मिलेंगे। कुँवर नारायण की कविता एक सजग और सतर्क नागरिक की कविता है; जिसमें मनुष्य की पीड़ा और उसके संघर्षों के साथ हमेशा ही एक मानवीय संवाद दिखाई पड़ता है। धीरज, विवेक, आत्मसजगता, जिजीविषा, संघर्ष और करुणा ऐसे बीज शब्द हैं, जिनसे कुँवर नारायण का 'रचना संसार आज तक उत्कर्ष पाता रहा है। एक तरह से शाश्वत मूल्यों की यह शब्दावली उनके कवि व्यक्तित्व का कविता में विकल्प ही बन गयी है, जिसमें समानता और न्याय पूरी प्रखरता से दीप्त होते हैं। इस संचयिता से गुजरकर कुँवर नारायण जैसे मूर्धन्य कवि के सरोकारों का अर्थ समृद्ध दायरा एक बार फिर से हमारी पकड़ में आयेगा, साथ ही इस बात की गवाही भी हाथ लगेगी कि सामाजिक न्याय व मनुष्यता के प्रति लगातार जोख़िम उठाने वाले कवि का दिल एक ऐसे दरवेश का दिल भी है, जिसमें दुनिया जहान की सच्चाई का खुला व विनम्र इज़हार मौजूद है।

About the writer

KUNWAR NARAYAN

KUNWAR NARAYAN अग्रणी कवि कुँवर नारायण उन विरल बुद्धिजीवियों में हैं जिन्होंने अपनी वैश्विक संवेदनाओं के साथ अपने देश की संस्कृति और इतिहास को पक्की ज़मीन दी है। वे प्रमुखतः कवि हैं, किन्तु साहित्य की सब तरह की विधाओं में भी शुरू से लिखते रहे हैं -- कहानी, समीक्षा, विचार, सिनेमा, निबन्ध, डायरी आदि। उनका पहला कविता संग्रह 1956 में छपा और वे आज तक लगातार लिख रहे हैं। कुँवर नारायण के लेखन का कई भारतीय तथा विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुआ है तथा वे अनेक राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हैं, जिनमें ‘कुमारन आशान’, ‘साहित्य अकादेमी’, ‘कबीर’, ‘शलाका’, ‘ऑनर ऑफ वार्सा यूनिवर्सिटी’, रोम का ‘प्रीमियो फ़ेरोनिया’, इलाहबाद से ‘डी.लिट्. की मानद उपाधि’, ‘ज्ञानपीठ’, ‘पद्म भूषण’ तथा साहित्य अकादेमी की ‘महत्तर सदस्यता’ हैं।

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