KAMAYANI KA RACHNA - SANSAR

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-255-4

Author:PREMSHANKAR

Pages:156

MRP:Rs.350/-

Stock:In Stock

Rs.350/-

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कामायनी छायावाद कि कृति है जिसमें हिन्दी स्व्छ्न्द्तावाद कि दो प्रमुख मुद्राएँ देखि जा सकती हैं, संस्कृति और रूमानी। कामायनी कालजयी कृतियों में हैं और इसमे संदेश नहीं कि हर युग में उसके कुछ पाठक अवश्य होंगे। उसे रामचारितमानस जैसे जनकाव्य के रूप में देखना भूल है क्योंकि इस प्रतियोगिता में तो कालिदास अथवा रवीन्द्र भी भाग नहीं लेना चाहेंगे। युग के बदलते सामाजिक परवेश और उसस्के परिणाम जनमने वाले आस्वाद और समीक्षा प्रतिमानों के आधार पर कामायनी बराबर नए विवेचनकि मांग करती रहेगी। इस पुस्तक में कामायनी पर नये सिरे से लेखन किया गया है।

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