Hindi Kahani Parampra Aur Pragati

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-354-1

Author:DR.HARDAYAL

Pages:216

MRP:Rs.450/-

Stock:Out of Stock

Rs.450/-

Details

हिन्दी कहानी परम्परा और प्रगति

Additional Information

विगत चार दशकों से हिन्दी आलोचना के क्षेत्र में सक्रिय डॉ. हरदयाल का वैशिष्ट्य इस बात में है कि उन्होंने समकालीन साहित्य की प्रत्येक विधा की आलोचना लिखी है। उनका वैशिष्ट्य इस बात में भी है कि उन्होंने अपने को किसी विशेष गुट, दल, में विचारधारा आदि के साथ बाँधने की अपेक्षा रचना-वस्तु को यथार्थ जीवन-सन्दों परखने और रचना के कलात्मक मूल्यों को समान महत्त्व देने को अधिक श्रेयस्कर समझा है। इसके कारण प्रभूत मात्रा में रचे जाने वाले समकालीन साहित्य में से श्रेष्ठ कृतियों को रेखांकित करने और केन्द्रीय प्रवृत्तियों का उद्घाटन करने में उन्हें सफलता मिली है। वे पक्षधर आलोचक न होकर नीर-क्षीर-विवेकी आलोचक हैं। वे हिन्दी में कहानी की सूक्ष्म विश्लेषणात्मक आलोचना लिखने वाले गिनेचुने आलोचकों में गणनीय हैं। उनकी कथा-साहित्य की आलोचना के सम्बन्ध में प्रेमचन्द जी के ज्येष्ठ पुत्र, 'कहानी' पत्रिका के यशस्वी सम्पादक-प्रकाशक और कहानी के विवेकशील पारखी श्रीयुत श्रीपतराय का मत है कि "आज वे हिन्दी कथा-साहित्य के एक विशिष्ट समीक्षक हैं। उनकी समीक्षा सस्पष्ट विचारों और सुनियोजित मीमांसा के आधार पर पाठकों का करती है । वे पूर्वग्रह अथवा अस्पष्टता के दोष से सर्वथा मुक्त हैं।" प्रस्तत पस्तक में उनकी श्रेष्ठ कहानी-आलोचना का संचयन है, जिसमें हम विकास की रूपरेखा भी विद्यमान है; उसकी प्रमुख प्रवृत्तियों का विवेचन भी शिखर कृतियों का रेखांकन भी है। हमारा विश्वास है कि यह कति जिज्ञास पाठकों को तृप्ति भी प्रदान करेगी और उन्हें विचारोत्तेजना भी देगी।

About the writer

DR.HARDAYAL

DR.HARDAYAL डॉ. हरदयाल जन्म : 24 मार्च 1939; जगत, बदायूँ, उत्तर प्रदेश। शिक्षा : एम. ए., पीएच.डी., डी. लिट्.। वृत्ति : अध्यापन 43 वर्ष तक उत्तर प्रदेश के तीन कॉलिजों और दिल्ली के श्यामलाल कॉलेज़ तथा दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं को पढ़ाने और पीएच.डी. के शोधछात्रों के निर्देशन-परीक्षण के पश्चात् सेवानिवृत्त। प्रकाशन : शोधप्रबन्ध-कबिराजा बॉकीदास : जीवन और साहित्य (पीएच.डी.); आधुनिक हिन्दी कविता का अभिव्यंजनाशिल्प (डी.लिट्.)। आलोचना : आधुनिक हिन्दी गद्य-साहित्य; हिन्दी कविता का समकालीन परिदृश्य; आधुनिक बोध और विद्रोह; कालजयी कथाकृति और अन्य निबन्ध; समकालीन अनुभव और कविता की रचनाप्रक्रिया; हिन्दी कविता : आठवाँ दशक; साहित्य और सामाजिक मूल्य; हिन्दी कविता की प्रकृति; आलोचना-कर्म; आधुनिक हिन्दी कविता; रचना और समालोचना। कविता-संग्रह : अखबार में अँधेरा; फूल-पत्थर; कंकाल आग। सम्पादन : आज की हिन्दी कविता; विचारों के बिम्ब; विश्वविद्यालय स्तरीय पन्द्रह पाठ्य पुस्तकें; ‘समीक्षा' त्रैमासिक डॉ. गोपाल राय के साथ। पुस्तक-रूप में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त आपकी कविताएँ, निबन्ध, आलोचना, संस्मरण आदि विधाओं की रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरन्तर प्रकाशित होती रहती हैं। साथ ही विभिन्न सम्पादित ग्रन्थों में भी आपकी रचनाएँ संगृहीत हुई हैं। सम्मान : ‘साहित्यकार-सम्मान', हिन्दी अकादमी, दिल्ली।

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