Hindi Kahani Parampra Aur Pragati

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-354-1

Author:DR.HARDAYAL

Pages:216

MRP:Rs.450/-

Stock:Out of Stock

Rs.450/-

Details

अकादमिक आलोचना के क्षेत्र में डॉ० हरदयाल की उपस्थिति एक विशेष मायने रखती थी. वे अपने विषय की बहुत गहरी समझ बूझ रखने वाले और आलोचकीय दृष्टि से संपन्न लेखक थे. डॉ० हरदयाल ने कथा-आलोचना पर हिन्दी में महत्त्वपूर्ण पुस्तकों की रचना की है. उन्होंने हिन्दी कहानी और साहित्येतिहास से सम्बन्धित कई पुस्तकों का सम्पादन भी किया है. डॉ० नगेन्द्र के 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' का परिवर्धित संस्करण उन्होंने ही सम्पादित किया है. वाणी प्रकाशन ने उनकी एक प्रमुख आलोचनात्मक कृति 'हिन्दी कहानी : परम्परा और प्रगति' प्रकाशित की है.

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