BHEEJAI DAS KABIR

Format:Paper Back

ISBN:978-935229-427-5

Author:LEELADHAR MANDLOI

Pages:128

MRP:Rs.225/-

Stock:Out of Stock

Rs.225/-

Details

भीजै दास कबीर

Additional Information

लीलाधर मंडलोई का जीवन और चिन्तन अब उस मोड़ पर आ पहुँचा है जहाँ वे ‘आख़िरी समय’ और ‘अँधेरे में घर’ जैसी कविता लिख सकते हैं। मंडलोई ने अपने निजी जीवन और सफरिंग को केन्द्र में रखकर पहले भी दर्ज़नों कविताएँ लिखी हैं और इस संग्रह में भी ऐसी कई कविताएँ हैं जिनमें संकट के बदले हुए रूप को लक्षित किया जा सकता है। जीवन के संकट को समय के संकट से जोड़ देते हैं और उसकी ऐसी कविताओं में निजी अस्तित्व और सामाजिक अस्तित्व का भेद मिट जाता है। दूसरी तरफ़ सड़क बनाने वाले, इमारतें बनाने वाले और खेतों-खलिहानों में काम करने वाले वंचित जनों पर उनकी नज़र पहले की तरह ही बनी हुई है। वंचित (सबाल्टर्न) समाज से गहरे जुड़ाव के कारण ही वे देख पाते हैं कि ‘उनके कन्धों पर रखी कुदाल चमकती रहती है अँधेरों में’।

About the writer

LEELADHAR MANDLOI

LEELADHAR MANDLOI लीलाधर मंडलोई जन्म: जन्माष्टमी। सही तिथि व साल अज्ञात। शिक्षा: बी.ए. बीएड. (अँग्रेज़ी) पत्राकारिता में स्नातक। एम.ए. (हिन्दी)। प्रसारण में उच्च-शिक्षा सी.आर.टी., लन्दन से। पदभार: दूरदर्शन, आकाशवाणी के महानिदेशक सहित कई राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय समितियों के साथ ही प्रसार भारती बोर्ड के सदस्य। कृतियाँ: घर-घर घूमा, रात बिरात, मगर एक आवाज़, काल बांका तिरछा, क्षमायाचना, लिखे में दुक्ख, एक बहुत कोमल तान, महज शरीर नहीं पहन रखा था उसने, उपस्थित है समुद्र (हिन्दी व रूसी में) (कविता-संग्रह); देखा-अदेखा, कवि ने कहा, हत्यारे उतर चुके हैं क्षीर सागर में, प्रतिनिधि कविताएँ, 21वीं सदी के लिए पचास कविताएँ (कविता चयन); कविता का तिर्यक (आलोचना); अर्थजल, दिल का किस्सा (निबन्ध); दाना-पानी, दिनन दिनन के फेर (डायरी); काला पानी (यात्रा-वृत्तान्त); बुन्देली लोकगीतों की किताब, अन्दमान निकोबार की लोककथाओं की दो किताबें; पेड़ भी चलते हैं, चाँद का धब्बा (बाल साहित्य)। सम्पादन: केदारनाथ सिंह संचयन, कविता के सौ बरस, स्त्राीमुक्ति का स्वप्न, कवि एकादश, रचना समय, समय की कविता आदि। अनुवाद: पानियों पे नाम (शकेब जलाली की गश्ज़लों का लिप्यन्तरण मंजश्ूर एहतेशाम के साथ)। माँ की मीठी आवाजश् (अनातोली पारपरा की रूसी कविताएँ, अनिल जनविजय के साथ)। फिष्ल्म: कई रचनाकारों पर डाक्यूमेंट्री निर्माण, निर्देशन तथा पटकथा लेखन। कुछ धारावाहिकों में कार्यकारी निर्माता तथा संगीत व साहित्य के ऑडियो-वीडियो सीडी, वीसीडी के निर्माण में सक्रिय भूमिका। सम्प्रति: निदेशक, भारतीय ज्ञानपीठ, नयी दिल्ली और साहित्यिक पत्रिका ‘नया ज्ञानोदय’ के सम्पादक।

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