ARJUN AND HIS VILLAGE IN INDIA

Original Book/Language:

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-074-1

Author:CAROL BARKER TRANSLATED BY PURVA YAGNIK KUSHWAHA

Translation:यह विलक्षण व सुन्दर चित्रा-सूचना पुस्तक तिलोनियां में हुये उनके अनुभवों का नतीजा है। इसमें स्थानीय लोगों के घरेलू जीवन, खेतीबारी, स्कूली पढ़ाई, धार्मिक अनुष्ठान व त्यौहार आदि शामिल हैं। 1977 के बाद से गत 35 वर्षों से कैरल नियमित रूप से बेयर फुट कॉलेज, तिलोनियां आती रही हैं। यह आज उनका दूसरा घर बन चुका है, वे ‘तिलोनियां परिवार’ की सदस्य हैं। वे प्रति वर्ष आती हैं तथा 2014 में भी बेयर फुट कॉलेज के विकास कार्यक्रमों में से कुछ से लगातार जुड़ी रही हैं। उन्हें उम्मीद है कि वे भविष्य में भी जुड़ी रहेंगी।

Pages:36

MRP:Rs.295/-

Stock:In Stock

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यह विलक्षण व सुन्दर चित्रा-सूचना पुस्तक तिलोनियां में हुये उनके अनुभवों का नतीजा है। इसमें स्थानीय लोगों के घरेलू जीवन, खेतीबारी, स्कूली पढ़ाई, धार्मिक अनुष्ठान व त्यौहार आदि शामिल हैं। 1977 के बाद से गत 35 वर्षों से कैरल नियमित रूप से बेयर फुट कॉलेज, तिलोनियां आती रही हैं। यह आज उनका दूसरा घर बन चुका है, वे ‘तिलोनियां परिवार’ की सदस्य हैं। वे प्रति वर्ष आती हैं तथा 2014 में भी बेयर फुट कॉलेज के विकास कार्यक्रमों में से कुछ से लगातार जुड़ी रही हैं। उन्हें उम्मीद है कि वे भविष्य में भी जुड़ी रहेंगी।

About the writer

CAROL BARKER TRANSLATED BY PURVA YAGNIK KUSHWAHA

CAROL BARKER TRANSLATED BY  PURVA YAGNIK KUSHWAHA कैरल बार्कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुप्रसिद्ध लेखिका व चित्राकार हैं जिन्होंने बालकों के लिए कई पुस्तकों की रचना की है। 1977 में कैरल, ऑक्सफैम के आमंत्राण पर राजस्थान आईं ताकि वे एक पुस्तक के लिए ज़मीनी शोध कर सकें। समाजकार्य एवं अनुसंधान केंद्र (एस.डब्ल्यू.आर.सी) तिलोनियां, जो अब बेयर फुट कॉलेज नाम से प्रसिद्ध है, में कैरल रुकीं। उनका मूल मकसद था एस.डब्ल्यू.आर.सी. के ग्रामीण विकास कार्यक्रमों का अध्ययन कर उनका दस्तावेज बनाना। उन्होंने संस्था के स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा तथा हस्तशिल्प सम्बन्धी ग्रामीण विकास कार्यक्रमों का अध्ययन तथा उनका दस्तावेजीकरण किया। इस दौरान वे तिलोनियाँ तथा आसपास के गाँवों के लोगों व उनकी संस्कृति से इस कदर प्रभावित हुईं कि उन्होंने तय किया कि वे और शोध कर तिलोनियां गाँव में रहने वाले एक बालक तथा पारंपरिक ग्रामीण जीवन पर एक पुस्तक की रचना करेंगी। अतः कैरल ने तिलोनियां के लोगों के स्केच बनाये, फोटो खींचे, उनसे साक्षात्कार किये।

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