Vagdevi Ki Ghar Wapasi

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-429-9

Author:ED. RAMESH CHANDRA SHAH

Pages:202

MRP:Rs.395/-

Stock:In Stock

Rs.395/-

Details

वाग्देवी की घर वापसी

Additional Information

...हमारे कई युवा कवि और कथाकार आँख-सामने की हक़ीक़त को - पारम्परिक मूल्यों के भ्रंश और विघटन को अनदेेखा नहीं करते और ऐसा करते हुए भी अपनी रचना के चरमकोण पर ही मानव-विवेक के अप्रत्याशित विस्फोट और पुनर्वास की सम्भावना को भी झलका ही देते हैं। मानो हमें अपनी वाग्देवी की घर-वापसी के लिए ही जाने-अनजाने पर्युत्सुक बनाते हुए.... × × × ...जो भी रोग समाज को व्यापता या व्यापनेवाला होता है, उसका सबसे पहला संक्रामक मानो साहित्यकार की अतिसंवेदनशील और इसीलिए अग्रगामी चेतना झेलती है और इस तरह उसका प्रतिरोधक टीका भी अपने भीतर ही बना देती है। हममें से ज्यादातर लोग तरह-तरह के कवच पहने रहते हैं : कवि-कथाकारों की निष्कवच संवेदना ही सत्य का सीधा संस्पर्श पाने योग्य होती है।... × × × वाक्-पटु लेखक दुनिया को ठगते हैं; भावुकताजीवी लेखक अपने-आपको। यहाँ उल्लिखित कवियों की रचनाएँ इन दोनों गड्ढों से सावधान और सुरक्षित हैं। कवि से एक खास किस्म की बुद्धिमत्ता की अपेक्षा हर देश-काल के समाजों को रही है और आज भी वह अपेक्षा जीवित है। उसे पूरी करने वाले रचनाकार भी। ज़रूरत सिर्फ़ उन्हेें पहचानने की है।

About the writer

ED. RAMESH CHANDRA SHAH

ED. RAMESH CHANDRA SHAH रमेशचन्द्र शाह का जन्म (1937) अल्मोड़ा (उत्तराखंड) में हुआ। आरम्भिक शिक्षा अल्मोड़ा में हुई। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.एससी. तथा आगरा से अंग्रेज़ी साहित्य में एम.ए. तथा पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। सन् 1997 में भोपाल के हमीदिया महाविद्यालय से अंग्रेज़ी विभागाध्यक्ष के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भोपाल स्थित ‘निराला सृजनपीठ’ के निदेशक रहे (दिसम्बर, सन् 2000 तक)। उपन्यास ‘पूर्वापर’ को भारतीय भाषा परिषद्, कोलकाता ने, ‘गोबरगणेश’ तथा काव्यकृति ‘नदी भागती आई’ को मध्यप्रदेश साहित्य परिषद् ने, आलोचना-पुस्तक ‘छायावाद की प्रासंगिकता’ को मध्यप्रदेश साहित्य परिषद् ने पुरस्कृत किया। उपन्यास ‘किस्सा गुलाम’ नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा आठ भारतीय भाषाओं में अनूदित। निबन्ध-संग्रह ‘स्वधर्म और कालगति’ को मध्यप्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा महावीर प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार प्रदान किया गया। श्री शाह को सन् 1987-88 में मध्यप्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा ‘शिखर-सम्मान’ से सन् 2001 में के.के. बिड़ला फाउंडेशन द्वारा ‘व्यास-सम्मान’ से तथा सन् 2004 में भारत सरकार द्वारा ‘पद्मश्री’ से अलंकृत किया जा चुका है। प्रकाशित कृतित्व: ‘रचना के बदले’, ‘शैतान के बहाने’, ‘आडई़ का पेड़’, ‘पढ़ते-पढ़ते’, ‘स्वधर्म और कालगति’ (निबन्ध-संग्रह); ‘कछुए की पीठ पर’, ‘हरिश्चन्द्र आओ’, ‘नदी भागती आई’, ‘प्यारे मुचकुन्द को’, ‘देखते हैं शब्द भी अपना समय’, चुनी हुई कविताओं का संकलन ‘चाक पर’ वाग्देवी प्रकाशन पॉकेट बुक संस्करण में उपलभ्य, तीन बाल कविता-संग्रह तथा दो बाल-नाटक भी (कविता-संग्रह); ‘गोबरगणेश’, ‘किस्सा गुलाम’, ‘पूर्वापर’, ‘आखिरी दिन’; ‘पुनर्वास’, ‘आप कहीं नहीं रहते विभूति बाबू’, ‘असबाब-ए-वीरानी’ (उपन्यास); ‘मुहल्ले का रावण’, ‘मानपत्रा’, ‘थिएटर’, ‘प्रतिनिधि कहानियाँ’ (कहानी-संग्रह); ‘एक लम्बी छाँह’ (यात्रा-संस्मरण); ‘छायावाद की प्रासंगिकता’, ‘समानान्तर’, ‘वागर्थ’, ‘भूलने के विरुद्ध’, ‘अज्ञेय: वागर्थ का वैभव’, ‘अज्ञेय का कवि कर्म’, ‘आलोचना का पक्ष’, दो साहित्य अकादेमी मोनोग्राफ जयशंकर प्रसाद तथा अज्ञेय पर (समालोचना); ‘मेरे साक्षात्कार’ (साक्षात्कार); काव्यानुवादों की चार पुस्तिकाएँ ‘तनाव’ पुस्तकमाला के अन्तर्गत प्रकाशित। ‘राशोमन’ नाटक का अनुवाद ‘मटियाबुर्ज’ नाम से (अनुवाद)। सम्पादन: प्रसाद रचना-संचयन तथा अज्ञेय काव्य-स्तबक (साहित्य अकादेमी), निराला-संचयन (महात्मा गाँधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के लिए)। पता: एम-4, निराला नगर, भदभदा रोड, भोपाल (म.प्र.)।

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