Sanchar Madhyam Lekhan

Format:Hard Bound

ISBN:81-8143-590-7

Author:GORISHANKAR RAINA

Pages:119

MRP:Rs.200/-

Stock:Out of Stock

Rs.200/-

Details

संचार माध्यम लेखन

Additional Information

डिजिटल युग में फाइवर ऑपटिक्स द्वारा संचार संभव होने के साथ ही सैटलाइट रेडियो का आगमन हो चुका है। सामूहिक प्रेषणीयता के नए माध्यमों द्वारा शब्दों के उच्चरित रूप, भाव और विचार को सजीवता प्रदान हो रही है। मुद्रित लेख की 'प्राइमेसी ऑफ़ टेकस्ट' रेडियो में मूल पाठ के रचियता के साथ संपर्क करवा कर 'स्पोकन वर्ड' का नया साहित्य रच रही है। संप्रेषण का एक नया बहुआयामी दृश्य-माध्यम नए 'विजुअल-टेकस्ट' रचने लगा है। जिसमें वर्युअल-दृश्य, टी.वी. होस्ट की अदाकारी, अभिनेता की भाव भंगिमाएँ, स्पेकटकल, संगीत और आलेख मिलकर एक नई दृश्य-श्रव्य भाषा बनाते हैं। एक नए 'विजुअल-टेकस्ट' का निर्माण हो रहा है। ऑन-लाइन समाचारपत्र-पत्रिकाएँ प्रकट हो गई हैं। डीटीएच टेक्नोलॉजी एक नया दर्शक-वर्ग तैयार कर रही है। जनसंचार की परिभाषा बदलने लगी है। मीडिया का अचानक तीव्र विस्तार इसकी प्रविधि को समझने के लिए विवश कर रहा है। प्रस्तुत पुस्तक में जहाँ लेखन के स्वरूप, इतिहास, रेडियो नाटक-प्रविधि तथा टीवी नाटक तकनीक का विश्लेषण हुआ है वहीं साहित्यिक विद्याओं की दृश्य-श्रव्य रूपांतरण कला व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा प्रसारित समाचारों के संकलन संपादन और प्रस्तुतिकरण की प्रविधि के बारे में भी लिखा गया है। यह पुस्तक, जन संचार के विद्यार्थियों, मीडिया से जुड़े व्यक्तियों, रेडियो-टीवी नाट्यकला में रुचि रखने वाले संवेदनशील कलाकारों व सामान्य पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

About the writer

GORISHANKAR RAINA

GORISHANKAR RAINA गौरीशंकर रैणा जन्म : 5 फरवरी 1954, श्रीनगर (कश्मीर) दौये वैले बर्लिन तथा एशियन मीडिया कम्यनिकेशन सेंटर सिंगापर से टेलीविज़न नाटकों के निर्देशन में प्रशिक्षित। एडवांस डिप्लोमा (मीडिया) के साथ ही फ़िल्म टी.वी. संस्थान पूणे से टेलीविजन कार्यक्रम निर्देशन में प्रशिक्षित। एन.एफ.डी.सी. की फ़िल्मों के लिए संवाद लेखन तथा रेडियो के लिए कई नाटकों का रूपांतर। टेलीविज़न नाटकों, वृत्तचित्रों तथा लाइव शोज का निर्देशन। प्रमुख टेलीफ़िल्में तथा नाटक- 'भीगी धूप', 'चीफ़ की दावत', 'शहनशाह इडियस', 'अनुभूति', 'खंडहर', 'विदाई', 'बंधन' तथा 'आख़िरी फैसला' 1450 से अधिक टेलीविज़न लाइव शोज़ का निर्देशन। वृत्तचित्र 'ओड ट पीस' के लिए लोक सेवा प्रसारण परस्कार। दूरदर्शन के लिए ही निर्देशित एक अन्य फ़िल्म 'द गोल्डन आर्ट' अंतर्राष्ट्रीय समारोहों में प्रदर्शित। कृतियाँ : 'एक वही मैं', (तीन लघु नाटकों का संकलन) 'संचार टेक्नोलॉजी' (शोधग्रंथ), 'यह राजधानी' (कहानी संग्रह का अनुवाद) 'पालने का पत' (बहचर्चित कश्मीरी नाटक का हिन्दी अनुवाद), कहानियों, लेख, एवं नाट्य अनुवाद विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। पुरस्कार : मानव संसाधन विकास मंत्रालय के केन्द्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा हिंदीतर भाषी हिंदी साहित्यकार सम्मान (1990-9101 संस्कति मंत्रालय द्वारा टेलीविजन नाटकों के लिए सीनियर फलोशिप। जम्मू-कश्मीर संस्कृति, कला एवं साहित्य अकादमी द्वारा रंगमंच प्रस्तुतियों के लिए सम्मानित। संप्रति : दिल्ली दूरदर्शन में कार्यक्रम अधिकारी।

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