Balsahitya Aur Aalochana

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-981-6

Author:SHYAM KASHYAP

Pages:364

MRP:Rs.695/-

Stock:In Stock

Rs.695/-

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बालसाहित्य कि बहुत सारी सीमाएँ रही है बल साहित्य में पुनरावृति कि प्रूवर्ती आम देखने को मिलती है। जोकि एक दोष के रूप में सामने आती है। और बहस का मुद्दा भी। भारतीय बालसाहित्य की एक सबसे प्रमुख विशेषता यह रही है कि उसने हमेशा ही वंचित समाज को केंद्र में रखा है। भारतीय बाल साहित्य ने प्रायः एक लकड़हारे को या गड़ेरिये को केंद्रीय पत्र बनाया है जो वीर और सच्चा होता है और आम जनता के लिए राक्षसों से लड़ता है या ऐसी वीरता भरा कोई काम करता है। कहानी के अंत उस अमुक गड़ेरिये को कोई बड़ा खज़ाना एमएल जाता है या उसे कहीं का रज़ा बना दिया जाता है। बालसाहित्य और आलोचना के लेखन का मुखय उद्देश्य ये है कि बल साहित्य का स्थान साहित्य में निश्चित किया जा सके।

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Anuj Kumar, Rekha Pandey

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