PAHAR DOPAHAR

Format:Paper Back

ISBN:978-93-2-5229-579-1

Author:ASGHAR WAJAHAT

Pages:216

MRP:Rs.125/-

Stock:In Stock

Rs.125/-

Details

असग़र वजाहत हिन्दी के उन गिने-चुने लेखकों में हैं जो अपने पाठकों से तारतम्य स्थापित कर रचना को आगे बढ़ाते हैं। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ न केवल पाठकों को पूरी तरह अपने अधिकार में ले लेती हैं बल्कि पाठक और रचना के बीच जीवन्त सम्बन्ध स्थापित हो जाता है।

Additional Information

पहर दोपहर' 'पहर दोपहर' में नाटकीयता के कारण एक ऐसी पठनीयता जो बहुत दुर्लभ है। पाठक उपन्यास को पढ़ना प्रारम्भ करता है और फिर उसे जल्दी से जल्दी समाप्त कर देना चाहता है क्योंकि उपन्यास में वर्णित जीवन और पाठक के बीच एक सीधा रिश्ता बन जाता है। असग़र वजाहत की पठनीयता उनका एक-एक महत्त्वपूर्ण पक्ष है जो इस उपन्यास में पूरी तरह देखा जा सकता है। उपन्यास केवल घटनाओं का वर्णन नहीं है। 'पहर दोपहर' लम्बी कहानी की प्रस्तुति भी नहीं है। दरसल यह सहज और रोचक शैली में लिखा गया उपन्यास पाठक को जगह-जगह रुक जाने और सोचने में विवश करता है। उपन्यास जीवन और जगत के जटिल सम्बधों की पड़ताल-सी करता है । मानव-मन की गहराइयों में उतर जाता है और कलात्मक ढंग से पात्रों और उनकी गतिविधियों को व्याख्यातित करता हैं । इस इस प्रकार यह उपन्यास न केवल पढ़ने बल्कि विचार करने का अवसर भी प्रदान करता है ।

About the writer

ASGHAR WAJAHAT

ASGHAR WAJAHAT जन्म : 5 जुलाई 1946, फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) भाषा : हिंदी विधाएँ : उपन्यास, कहानी, नाटक मुख्य कृतियाँ उपन्यास : सात आसमान, कैसी आगी लगाई, रात में जागने वाले, पहर-दोपहर, मन माटी, चहारदर, फिरंगी लौट आये, जिन्ना की आवाज, वीरगति नाटक : जित लाहौर नईं वेख्या वो जन्‍म्‍या ई नईं, अकी, समिधा नुक्कड़ नाटक : सबसे सस्ता गोश्त कहानी संग्रह : मैं हिंदू हूँ, दिल्ली पहुँचना है, स्वीमिंग पूल, सब कहाँ कुछ यात्रा संस्मरण : चलते तो अच्छा था, इस पतझड़ में आना आलोचना : हिंदी-उर्दू की प्रगतिशील कविता सम्मान कथा क्रम सम्मान, हिंदी अकादमी, इंदु शर्मा कथा सम्मान संपर्क 79, कला विहार, मयूर विहार, फेज 1, दिल्ली-110091

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