Bhartiya Evam Pashchatya Kavyashashtra Ki Pehchan

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-811-9

Author:PROF. HARIMOHAN

Pages:154

MRP:Rs.300/-

Stock:In Stock

Rs.300/-

Details

भारतीय एवं पाश्चात्य काव्यशास्त्र की पहचान

Additional Information

भारतीय एवं पाश्चात्य काव्यशास्त्र पर यों तो ढेरों पुस्तकें हैं, किन्तु संक्षेप में और पारदर्शिता के साथ इनकी पहचान कराने वाली पुस्तकें बहुत कम हैं। यह पुस्तक एक पाठ्य पुस्तक के रूप में लिखी गयी है, जो उक्त आवश्यकता को ध्यान में रखती है। आचार्य विजयेन्द्र स्नातक ने लेखक की भारतीय काव्यशास्त्र पर लिखी पुस्तक पर अपना अभिमत देते हुए लिखा था"सिद्धान्त निरूपण कठिन और दुरूह कार्य है। सिद्धान्तों में तत्वों का आख्यान निहित होता है। वही व्यक्ति सिद्धान्तों का सम्यक् प्रतिपादन कर सकता है जो उनकी सूक्ष्म एवं गूढ मीमांसा से भली-भाँति परिचित हो। डॉ. हरिमोहन ने संकलन वृत्ति से सामग्री का चयन कर उसका विवेचन प्रस्तुत किया है। विवेचन में उनकी भाषा सरल है और भाव प्रकाशन में सक्षम है। यह अभिमत इस पुस्तक पर भी चरितार्थ होता है। इस पुस्तक में भारतीय एवं पाश्चात्य काव्यशास्त्र की शृंखलाबद्ध रूपरेखा को प्रस्तुत करते हुए प्रमुख सम्प्रदायों एवं सिद्धान्तों का सार दिया गया है। यह विषय सामग्री भारतीय एवं पाश्चात्य काव्यशास्त्र के जिज्ञासुओं को उनकी पहचान कराने में सहायक होगी, ऐसा माना जा सकता है।

About the writer

PROF. HARIMOHAN

PROF. HARIMOHAN डॉ. हरिमोहन हिन्दी-साहित्य और पत्रकारिता-विषयक अनेक पुस्तकों के लेखक; मूलतः कवि, कथाकार और समीक्षक। अब तक 35 पुस्तकें प्रकाशित। आलोचना की 10 पुस्तकों में से उल्लेखनीय पुस्तकें हैं - साहित्यिक विधाएँ पुनर्विचार, कालजयी कवि भवानी प्रसाद मिश्र, मध्य कालीन काव्य : पहचान और परख, नव्यतर गद्य विधाएँ। रेडियो और दूरदर्शन पत्रकारिता, सूचना प्रौद्योगिकी और जनसंचार, आधुनिक जनसंचार और हिन्दी। प्रायः सभी पत्र-पत्रिकाओं में व्यापक लेखन। अनेक देशों की यात्राएँ। एक दर्जन से अधिक राष्ट्रीय एवं उ.प्र. राज्य स्तरीय पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त। 25 वर्ष तक (1978 से 2003) हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर, गढ़वाल में प्राध्यापक, उपाचार्य एवं आचार्य तथा हिन्दी विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य करने के बाद 2003 से डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय आगरा के प्रतिष्ठित क. मुंशी हिन्दी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ में हिन्दी साहित्य के आचार्य एवं विभागाध्यक्ष। कुछ समय तक आगरा विश्वविद्यालय के कुलसचिव के पद का दायित्व-निर्वहन।

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