Cheelghar

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5229-486-2

Author:RAMASHANKAR NISHESH

Pages:66

MRP:Rs.125/-

Stock:In Stock

Rs.125/-

Details

चीलघर

Additional Information

‘चीलघर’ नाटक आज के युग के कड़वे सत्य को उजागर एवं जीवित करता है। ये एक ऐसा सत्य जो इतना क्रूर, जिसे कहीं से भी उठाया जा सकता है। कुछ समझ में नहीं आता, समस्त सामाजिक ढाँचा अस्त-व्यस्त सा लगता है जो अववाहन करता दिखाई देता है। इसका हल सिर्फ मेरे, आपके, हमारे हाथ में है एवं केवल हमसे सम्बन्धित है, अन्य कोई कुछ नहीं कर सकता। इस जिम्मेदारी को केवल हमें ही उठाना होगा। कभी बचपन में सुनते थे दादी माँ की कहानी, या नानी माँ की कहानी, जो वास्तविक रूप में हमारे मस्तिष्क में इस तरह से बैठ जाती थी जिसे हम सारा जीवन कभी भुला नहीं पाते थे। हमने सुना है माँ बच्चे को जन्म देने से पहले उसे इतना योग्य बना देती थी कि आगे आने वाली परिस्थितियों से जूझने की शक्ति उसमें पहले से ही मौजूद रहती थी। अभिमन्यु का चक्रव्यूह में घुस जाना, गर्भ में ही प्रवेश करने का ज्ञान, एकलव्य को देखकर ही निशाना बाँधने का ज्ञान उन सबको केवल अपनी माता द्वारा ही प्राप्त हो सका था। हमारे ग्रन्थों में ऐसे बहुत से उदाहरण मिलते हैं।

About the writer

RAMASHANKAR NISHESH

RAMASHANKAR NISHESH रमाशंकर निशेश सन् 1931 में जन्मे रमाशंकर निशेश रंगमंच के एक सुपरिचित नाटककार हैं। कुछ समय स्नातक के रूप में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में रहे। इलाहाबाद नाट्य संघ द्वारा इनके कई नाटकों को पुरस्कृत किया गया। साहित्य कला परिषद् दिल्ली द्वारा नाटक 'आदमखोर' सर्वोत्तम नाट्य-लेखन के लिए प्रथम पुरस्कार से पुरस्कृत तथा दिल्ली नाट्य संघ द्वारा 1983 में रंगमंच में उनकी विशेष सेवाओं के लिए सम्मानित होने के साथ ही उन्हें वर्तमान में आठवाँ नटसम्राट सम्मान 2016 से भी सम्मानित किया गया। रंगमंच से पूर्णतया जुड़े रहने के कारण उनके सभी नाटक मंचनीय हैं रचनाएँ : आदमखोर; कुक्कू डार्लिंग; कोठा; अमीबा; अपभ्रंश; प्यार कैसे होता है; महासम्मेलन; सीपियाँ; मेमो; अपनी डफली, अपना राग; कुत्ता किसका है; डूबा वंश कबीर का।

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